Iran Violence 2026:
Iran Violence 2026: ईरान में बढ़ती महंगाई, गिरती करेंसी और तानाशाही के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों ने अब एक अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक युद्ध का रूप ले लिया है। अमेरिका के दिग्गज सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को सीधी और बेहद कड़ी चेतावनी दी है। ग्राहम ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरानी सुरक्षा बलों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों का कत्लेआम बंद नहीं किया, तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सीधे सुप्रीम लीडर को निशाना बनाने का आदेश जारी कर सकते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान के कई शहर गृहयुद्ध जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
एक प्रमुख टेलीविजन इंटरव्यू के दौरान रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने ईरान के शासन को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब ईरान में मानवाधिकारों के उल्लंघन को मूकदर्शक बनकर नहीं देखेगा। ग्राहम ने तेहरान के धार्मिक नेतृत्व को संबोधित करते हुए कहा, “यदि आप उन बेगुनाह लोगों की हत्या करना जारी रखते हैं जो केवल एक बेहतर जीवन और बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे हैं, तो याद रखें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आपको खत्म करने का आदेश दे सकते हैं।” उन्होंने ईरानी नेतृत्व को आगाह किया कि वे ट्रंप की प्रतिबद्धता को कम आंकने की गलती न करें।
ईरान में पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से जनता सड़कों पर है। इस विद्रोह की मुख्य वजह देश की चरमराती अर्थव्यवस्था और आसमान छूती महंगाई है। प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरानी सरकार ने इंटरनेट बंद करने और सुरक्षा बलों को खुली छूट देने जैसे सख्त कदम उठाए हैं। खबरों के मुताबिक, अब तक 35 से ज्यादा प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं और सैकड़ों घायल हैं। कई शहरों से ऐसी फुटेज सामने आई हैं जहाँ सुरक्षा बल सीधे भीड़ पर गोलियां चला रहे हैं। अमेरिका ने इस हिंसक दमन को अंतरराष्ट्रीय अपराध करार दिया है।
सीनेटर ग्राहम ने अपने बयान में केवल धमकी ही नहीं दी, बल्कि अमेरिका की पिछली कार्रवाइयों का हवाला भी दिया। उन्होंने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अमेरिकी कड़े रुख का उदाहरण देते हुए कहा कि वाशिंगटन किसी भी ऐसे शासन के खिलाफ कार्रवाई करने से नहीं हिचकिचाएगा जो अपने ही लोगों का दमन करता है। उन्होंने तर्क दिया कि ईरान की वर्तमान कार्रवाई जवाबी सैन्य कार्रवाई को न्योता दे रही है। अमेरिका का मानना है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ ‘खतरनाक ताकत’ का इस्तेमाल करना तेहरान के लिए आत्मघाती साबित होगा।
ईरान में चल रहे ये प्रदर्शन अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में भी फैल गए हैं। पश्चिमी शहर अब्दानन से आए वीडियो में हजारों की भीड़ ‘खामेनेई मुर्दाबाद’ के नारे लगाती देखी जा सकती है। ईरान जैसे देश में, जहाँ सर्वोच्च नेता की आलोचना करना मौत की सजा के बराबर माना जाता है, वहां ऐसे नारे लगना शासन की जड़ों के हिलने का संकेत है। सोशल मीडिया पर कुछ अपुष्ट खबरें यह भी दावा कर रही हैं कि पुलिस के कुछ जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने से इनकार कर दिया है और उनके साथ शामिल हो गए हैं।
ईरान वर्तमान में दोतरफा संकट से जूझ रहा है। एक तरफ घरेलू स्तर पर जनता का भारी असंतोष है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़े प्रतिबंधों और अमेरिका की सैन्य धमकियों का साया है। लिंडसे ग्राहम का यह बयान कि “ट्रंप को गंभीरता से लें,” तेहरान के लिए एक बड़ा संकेत है कि अमेरिका इस बार कूटनीतिक रास्तों से आगे बढ़कर कड़े फैसले ले सकता है। यदि ईरान ने हिंसा नहीं रोकी, तो आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया में तनाव एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुँच सकता है।
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