Iran War Impact
Iran War Impact : ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य संघर्ष का प्रभाव अब केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसकी तपिश आम आदमी की रसोई तक पहुँचने लगी है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने शुक्रवार को एक चिंताजनक रिपोर्ट जारी करते हुए बताया कि मार्च महीने में वैश्विक खाद्य कीमतों का सूचकांक (Food Price Index) पिछले साल सितंबर के बाद अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है। गैस और ईंधन की किल्लत ने परिवहन और उत्पादन लागत को बढ़ा दिया है, जिससे खाद्य वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो आने वाले समय में भुखमरी और महंगाई का संकट और गहरा सकता है।
एफएओ के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो के अनुसार, वर्तमान में कीमतों में हुई वृद्धि का मुख्य कारण पेट्रोल और डीजल की बढ़ती दरें हैं। हालांकि, वैश्विक स्तर पर अनाज का भंडार पर्याप्त होने के कारण अभी स्थिति पूरी तरह बेकाबू नहीं हुई है। लेकिन असली खतरा भविष्य की बुवाई को लेकर है। टोरेरो ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष 40 दिनों से अधिक चलता है, तो खेती की लागत इतनी बढ़ जाएगी कि किसान या तो कम बुवाई करेंगे या खाद (उर्वरक) का उपयोग कम कर देंगे। इससे अगले साल की पैदावार पर सीधा असर पड़ेगा, जिससे अनाज की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर जा सकती हैं।
एफएओ का खाद्य मूल्य सूचकांक, जो वैश्विक स्तर पर व्यापार की जाने वाली खाद्य वस्तुओं की एक टोकरी के मूल्यों को मापता है, फरवरी की तुलना में 2.4% बढ़ गया है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 1% अधिक है। हालांकि, यह मार्च 2022 (यूक्रेन युद्ध के समय) के अपने उच्चतम स्तर से अभी भी 20% नीचे है, लेकिन निरंतर हो रही वृद्धि ने आर्थिक विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। उर्वरकों की बढ़ती कीमतों ने ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे बड़े उत्पादक देशों में फसल की संभावनाओं को कमजोर कर दिया है।
पिछले एक महीने में अनाज मूल्य सूचकांक में 1.5% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय गेहूं की कीमतें 4.3% तक बढ़ गई हैं। सबसे अधिक असर वनस्पति तेलों पर पड़ा है, जिनकी कीमतों में लगातार तीसरे महीने 5.1% की भारी वृद्धि हुई है। ताड़ (Palm Oil), सोया और सूरजमुखी के तेल की कीमतें मध्य 2022 के बाद अपने उच्चतम स्तर पर हैं। ऊर्जा संकट के कारण जैव ईंधन (Bio-fuel) की बढ़ती मांग ने खाद्य तेलों की उपलब्धता को कम कर दिया है, जिससे आम उपभोक्ता की जेब पर बोझ बढ़ गया है।
सिर्फ अनाज ही नहीं, बल्कि चीनी और मांस के शौकीनों के लिए भी बुरी खबर है। मार्च में चीनी की कीमतों में 7.2% का उछाल आया है, जो अक्टूबर 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। इसका बड़ा कारण ब्राजील द्वारा गन्ने का उपयोग चीनी के बजाय इथेनॉल उत्पादन में करना है। वहीं, यूरोपीय संघ और ब्राजील में पशुओं के चारे की बढ़ती लागत के कारण मांस की कीमतों में भी 1.0% की वृद्धि देखी गई है। हालांकि, एफएओ ने 2025 के लिए वैश्विक अनाज उत्पादन का अनुमान बढ़ाकर 3.036 अरब मीट्रिक टन कर दिया है, जो एक उम्मीद की किरण है, बशर्ते युद्ध जल्द समाप्त हो जाए।
ईरान युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आधुनिक दुनिया में कोई भी संघर्ष स्थानीय नहीं होता। ईंधन से शुरू हुई यह आग अब उर्वरक, अनाज और अंततः आम आदमी की थाली तक पहुँच चुकी है। यदि वैश्विक समुदाय ने जल्द ही मध्यस्थता कर युद्ध को नहीं रोका, तो रिकॉर्ड पैदावार के अनुमान के बावजूद ऊँची लागत के कारण खाद्य सुरक्षा का संकट पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लेगा। महंगाई का यह ‘फव्वारा’ फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है।
IPL 2026 PBKS vs CSK : इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन का रोमांच…
Earthquake in Delhi : शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026 की रात उत्तर भारत के एक बड़े…
Iran US War : मध्य पूर्व के रणक्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली और तनावपूर्ण…
Heartbeat Authentication : आने वाले समय में आपको अपने स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप को अनलॉक…
Raisin Water Benefits : किशमिश का पानी स्वास्थ्य के लिए किसी जादुई औषधि से कम…
Shash Rajyoga Benefits : भारतीय ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को 'न्याय का देवता' और…
This website uses cookies.