Iran US Warning : ईरान और इजरायल के बीच तनाव अपने चरम पर है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ की उस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें काट्ज़ ने ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को “मौत के लिए निशाना बनाने” की बात कही थी। अराघची ने इस मामले में सीधे अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि वाशिंगटन को अपने “तेल अवीव वाले पालतू जानवर” को तुरंत काबू में रखना चाहिए, अन्यथा इसके परिणाम बेहद विनाशकारी होंगे।

ईरान ने स्पष्ट किया है कि यदि इजरायल ने उनके नेतृत्व या नागरिकों को निशाना बनाने की कोशिश की, तो तेहरान की ओर से उसका तत्काल और मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। अराघची ने यह भी याद दिलाया कि अमेरिका ने समझौते की शर्तों को लागू करने का वादा किया था, और यदि इजरायल अपने अमेरिकी आका की बात नहीं मानता, तो ईरान उसे सबक सिखाने में संकोच नहीं करेगा।

परमाणु हथियारों को लेकर नेतन्याहू के दावों पर मचा घमासान
इस बीच, इजरायल के भीतर ही प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने बयानों को लेकर घिर गए हैं। इजरायल के पूर्व सेना प्रमुख और विपक्षी दल के नेता गादी आइज़ेनकोट ने नेतन्याहू पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एक कॉन्फ्रेंस के दौरान आइज़ेनकोट ने दावा किया कि नेतन्याहू ने इजरायली जनता को डराने के लिए ईरान के परमाणु हथियारों को लेकर झूठ बोला है। उन्होंने कहा कि नेतन्याहू द्वारा यह कहना कि “ईरान के पास पहले से ही परमाणु बम थे,” पूरी तरह से निराधार और भ्रामक है। विपक्षी नेताओं का मानना है कि प्रधानमंत्री अपनी विफलताओं को छिपाने और जनता में डर का माहौल पैदा करने के लिए वास्तविकता को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रहे हैं। गौरतलब है कि ईरान लंबे समय से अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता रहा है।
शांति वार्ता और समझौते को लेकर बना संशय
कूटनीतिक स्तर पर ईरान और अमेरिका के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का दौर कतर की राजधानी दोहा में चल रहा है। हालांकि, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी सीधी या आमने-सामने की बातचीत से स्पष्ट इनकार किया है। वार्ता का मुख्य केंद्र एक अंतरिम समझौते को लागू करना है, जिसमें ईरान के रोके गए फंड को जारी करना भी शामिल है। अमेरिकी वार्ताकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर इस दिशा में सक्रिय हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह समझौता कागज पर तो आकर्षक दिखाई देता है, लेकिन इसकी क्रियान्वयन प्रक्रिया को लेकर ईरान के भीतर ही गहरा असंतोष और अविश्वास पनप रहा है।
मध्य पूर्व में गहराता संकट और अनिश्चित भविष्य
ईरान के भीतर यह बहस तेज हो गई है कि क्या यह तथाकथित समझौता वास्तव में कभी लागू हो पाएगा या यह केवल समय बिताने की एक कूटनीतिक चाल है। एक तरफ इजरायल की आक्रामक बयानबाजी और दूसरी तरफ ईरान की धमकियों ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र को एक बारूद के ढेर पर लाकर खड़ा कर दिया है। अमेरिका की भूमिका इस पूरे प्रकरण में मध्यस्थ की है, लेकिन इजरायल और ईरान के बीच बढ़ती खाई के कारण किसी ठोस समाधान तक पहुँचना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। आने वाले दिन क्षेत्र की शांति के लिए अत्यंत निर्णायक होंगे, क्योंकि सैन्य और कूटनीतिक दोनों मोर्चों पर अनिश्चितता बनी हुई है।
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