IRIS Dena Sunk: हिंद महासागर के शांत जल क्षेत्र में एक ऐसी घटना घटी है जिसने वैश्विक राजनीति और सैन्य गलियारों में भूचाल ला दिया है। अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने ईरान के युद्धपोत IRIS Dena को टॉरपीडो से निशाना बनाकर समुद्र की गहराइयों में भेज दिया है। यह हमला उस समय हुआ जब ईरानी फ्रिगेट भारत में आयोजित एक महत्वपूर्ण नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा लेकर वापस लौट रहा था। इस घटना ने न केवल अमेरिका और ईरान के बीच सीधे टकराव को जन्म दिया है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
श्रीलंका के तट के पास भीषण हमला: द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली ऐसी कार्रवाई
प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, यह घातक हमला श्रीलंका के दक्षिणी तट के करीब अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में हुआ। अमेरिकी पनडुब्बी ने सटीक निशाना साधते हुए IRIS Dena पर टॉरपीडो दागे, जिससे जहाज के परखच्चे उड़ गए। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऐतिहासिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण घटना है, क्योंकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह पहला मौका है जब अमेरिका ने किसी दुश्मन देश के जहाज को डुबोने के लिए सक्रिय रूप से टॉरपीडो का इस्तेमाल किया है। इस कार्रवाई ने आधुनिक नौसैनिक युद्ध के नियमों को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।
ईरान की कड़ी चेतावनी: “समुद्र में किया गया बड़ा अपराध”
इस हमले के तुरंत बाद ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अमेरिका को आड़े हाथों लिया। उन्होंने इस कार्रवाई की तीव्र निंदा करते हुए इसे ‘समुद्र में किया गया एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय अपराध’ करार दिया। अरघची ने स्पष्ट किया कि IRIS Dena कोई हमलावर मिशन पर नहीं था, बल्कि वह भारत के साथ मैत्रीपूर्ण अभ्यास से लौट रहा था। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वाशिंगटन को इस दुस्साहस के लिए “बहुत भारी कीमत” चुकानी पड़ेगी, जिससे संकेत मिलते हैं कि ईरान आने वाले दिनों में जवाबी कार्रवाई कर सकता है।
भारत के ‘मिलन 2026’ अभ्यास से लौट रहा था ईरानी फ्रिगेट
IRIS Dena, जो कि एक आधुनिक फ्रिगेट श्रेणी का युद्धपोत था, हाल ही में भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित MILAN 2026 और इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) का हिस्सा बना था। 18 से 25 फरवरी तक चले इस भव्य नौसैनिक कार्यक्रम में दुनिया भर की नौसेनाओं ने भाग लिया था। विशाखापट्टनम से अपनी वापसी यात्रा के दौरान, जब यह जहाज ईरान की ओर बढ़ रहा था, तभी इसे बीच रास्ते में ही निशाना बनाया गया। भारत के लिए भी यह कूटनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन गया है क्योंकि हमला एक ऐसे जहाज पर हुआ जो भारत के निमंत्रण पर एक शांतिपूर्ण अभ्यास में शामिल हुआ था।
भारी जनहानि: बचाव अभियान और डरावने वीडियो फुटेज
हमले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहाज पर सवार लगभग 130 नाविकों में से 80 के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। श्रीलंका की नौसेना ने तत्परता दिखाते हुए एक बचाव अभियान चलाया और अब तक करीब 30 नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला है। घायल नाविकों का इलाज श्रीलंका के गाले (Galle) स्थित करापिटिया अस्पताल में चल रहा है। इस बीच, अमेरिकी रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक ड्रोन फुटेज ने दुनिया को दहला दिया है। वीडियो में देखा जा सकता है कि शांत समुद्र में बढ़ रहे जहाज के पिछले हिस्से में अचानक एक विशाल विस्फोट होता है और देखते ही देखते मलबे का गुबार आसमान छूने लगता है।
मध्य पूर्व में महायुद्ध के बादल: खामेनेई की मौत और बढ़ता तनाव
यह हमला किसी एकांत घटना का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उस सिलसिले की अगली कड़ी है जो 28 फरवरी को शुरू हुआ था। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए भीषण हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबरों ने पहले ही पूरे मध्य पूर्व को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिकी ठिकानों वाले देशों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों की झड़ी लगा दी है। अब हिंद महासागर में इस सीधी सैन्य कार्रवाई ने विश्व शक्तियों को दो धड़ों में बांट दिया है, जिससे तीसरे विश्व युद्ध की आहट तेज हो गई है।
















