Kurdistan Drone Strike
Kurdistan Drone Strike : इराक के स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र के राष्ट्रपति नेचिरवन बरजानी के दुहोक स्थित घर पर विस्फोटक ड्रोन से हमला किया गया। स्थानीय मीडिया और कुर्दिस्तान सरकार के अनुसार, हमले के वक्त घर खाली था, जिसकी वजह से किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, हालांकि संपत्ति को काफी नुकसान पहुँचा है। सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि कुल पाँच ड्रोन क्षेत्र में भेजे गए थे, जिनमें से कुछ को एयर डिफेंस सिस्टम ने मार गिराया, लेकिन एक ड्रोन राष्ट्रपति के आवास पर गिरने में कामयाब रहा।
इस हमले के तुरंत बाद कुर्दिस्तान क्षेत्र के प्रधानमंत्री मसूर बरजानी ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इसकी कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे एक “कायरतापूर्ण आतंकी हमला” करार देते हुए इराकी संघीय सरकार से मांग की है कि वह अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कुर्दिस्तान अपनी रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है। प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस क्षेत्र की स्थिरता बनाए रखने के लिए समर्थन की अपील की है।
इस घटना ने वैश्विक नेताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने राष्ट्रपति बरजानी से फोन पर बात की और इस हमले को “अस्वीकार्य” बताते हुए इसकी निंदा की। मैक्रों ने दोहराया कि फ्रांस इराक और कुर्दिस्तान की संप्रभुता के साथ खड़ा है। गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब इस क्षेत्र में अमेरिकी और इजरायली सैन्य कार्रवाइयों के बाद ईरान समर्थित समूहों और कुर्दों के बीच तनाव अपने चरम पर है।
पिछले कुछ समय से ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि मध्य पूर्व की इस जंग में कुर्द लड़ाके ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं। हाल ही में हुए ईरानी मिसाइल हमलों में छह पेशमेरगा (Kurdish fighters) जवानों की मौत ने आग में घी का काम किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बरजानी के घर पर हुआ यह हमला कुर्द नेतृत्व को डराने या उन्हें सीधे संघर्ष में घसीटने की एक कोशिश हो सकती है। इराक के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी ने भी इस घटना की जांच के लिए एक संयुक्त सुरक्षा टीम गठित करने के आदेश दिए हैं।
इराक फिलहाल एक नाजुक दौर से गुजर रहा है। एक तरफ बगदाद खुद को क्षेत्रीय संघर्षों से दूर रखने की कोशिश कर रहा है, तो दूसरी तरफ कुर्दिस्तान क्षेत्र पर लगातार हो रहे ये हमले उसकी स्थिरता को चुनौती दे रहे हैं। यदि इन हमलों का सिलसिला नहीं थमा, तो मध्य पूर्व का यह हिस्सा एक बड़े युद्ध के मैदान में तब्दील हो सकता है, जिसमें कुर्द सेना, इराकी मिलिशिया और अंतरराष्ट्रीय ताकतें आमने-सामने होंगी।
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