Netanyahu military plan: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। इज़राइल की कैबिनेट ने एक बड़ा और विवादास्पद फैसला लेते हुए गाज़ा पट्टी के सबसे अहम इलाके, गाजा शहर पर सैन्य कब्ज़े की योजना को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी मीडिया संगठन Axios और कतरी चैनल Al Jazeera ने शुक्रवार को इस खबर की पुष्टि की।
इस फैसले के पीछे प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की स्पष्ट सैन्य रणनीति है, जिसका उद्देश्य गाजा में मौजूद हमास के सैन्य ढांचे को पूरी तरह खत्म करना है। हालांकि, इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने अभी तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
इज़रायली मीडिया के अनुसार, कैबिनेट ने जिस प्रस्ताव को मंजूरी दी है, उसमें:
गाजा शहर में सैन्य अभियान चलाना
वहां रह रहे आम नागरिकों को युद्ध क्षेत्र से बाहर निकालना
हमास लड़ाकों की घेराबंदी करना और
जमीनी सैन्य कार्रवाई के ज़रिए गाज़ा शहर पर कब्ज़ा करना शामिल है।
सूत्रों के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2025 तक इज़रायली सेना गाज़ा शहर से आम फिलिस्तीनी नागरिकों को हटा कर उन्हें केंद्रीय शरणार्थी शिविरों और अन्य सुरक्षित क्षेत्रों में भेजेगी। इसके बाद ही सेना जमीनी कार्रवाई को अंजाम देगी।
इससे पहले गुरुवार को एक अमेरिकी चैनल को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कहा कि इज़रायल गाजा पर कब्जा तो करेगा, लेकिन उसका उद्देश्य वहां स्थायी शासन नहीं, बल्कि एक सुरक्षा घेरा बनाना है। “हम गाज़ा पर शासन नहीं करना चाहते, लेकिन हम एक ऐसा सैन्य ढांचा बनाना चाहते हैं जिससे इज़रायल की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके,” – बेंजामिन नेतन्याहू। हालांकि, इज़रायल के कई रक्षा विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि गाज़ा शहर पर कब्ज़ा करने का मतलब लंबे समय तक वहां सैन्य उपस्थिति बनाए रखना होगा, जिससे मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय आलोचना बढ़ सकती है।
अभी तक अमेरिका, यूरोपीय यूनियन या संयुक्त राष्ट्र की ओर से इस फैसले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि गाज़ा पर पूर्ण कब्जे की योजना को लेकर मध्य पूर्व में गहरी चिंता और विरोध उभर सकता है।गाज़ा पर कब्जे की घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब क्षेत्र में पहले से ही लगातार संघर्ष, रॉकेट हमले और मानवीय संकट का माहौल बना हुआ है।
गाज़ा शहर हमास का मुख्य गढ़ माना जाता है। यहां लाखों फिलिस्तीनी नागरिक रहते हैं, जो पिछले कई महीनों से बिजली, पानी, दवाइयों और भोजन की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। अगर इज़रायल की जमीनी कार्रवाई तेज होती है तो आम नागरिकों के लिए हालात और भयावह हो सकते हैं।
इज़रायल के इस ऐतिहासिक फैसले ने गाज़ा संकट को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। गाज़ा पर कब्जा करना जितना आसान राजनीतिक नारा लग सकता है, जमीनी स्तर पर इसके परिणाम उतने ही जटिल और दूरगामी होंगे। अब सबकी निगाहें अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की प्रतिक्रिया और इज़रायली सेना की आगे की रणनीति पर टिकी हैं।
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