Lebanon Crisis
Lebanon Crisis: लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने गहराते मानवीय संकट के बीच अपने पाकिस्तानी समकक्ष शहबाज शरीफ से संपर्क साधा है। सलाम ने शहबाज शरीफ से यह पुष्टि करने का पुरजोर अनुरोध किया है कि ईरान और अमेरिका के बीच हुए युद्धविराम समझौते में लेबनान को भी अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। यह अपील तब आई है जब एक ही दिन में इजरायली हमलों ने लेबनान में भारी तबाही मचाई है। लेबनानी पीएम कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, सलाम ने इस्लामाबाद की मध्यस्थता की सराहना की, लेकिन साथ ही आगाह किया कि यदि लेबनान को इस सुरक्षा घेरे में नहीं लिया गया, तो निर्दोष नागरिकों की मौत का सिलसिला नहीं रुकेगा।
शांति प्रयासों के बीच इजरायल और अमेरिका ने एक बेहद चौंकाने वाला रुख अपनाया है। दोनों देशों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वर्तमान युद्धविराम केवल ईरान और अमेरिका के सीधे संघर्ष तक सीमित है और लेबनान इस समझौते की परिधि में नहीं आता। इजरायल ने घोषणा की है कि वह लेबनानी सीमा के भीतर अपने सैन्य अभियान और हवाई हमले जारी रखेगा। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता की लहर पैदा कर दी है, क्योंकि लेबनान को किनारे रखने से क्षेत्रीय स्थिरता का सपना अधूरा रह सकता है।
ईरान ने इजरायल की इस कार्रवाई और लेबनान को सीजफायर से बाहर रखने की कोशिशों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। ईरान के संसदीय अध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा कि तेहरान लेबनान को “युद्धविराम का अभिन्न अंग” मानता है। यदि लेबनान पर हमले नहीं रुके, तो इसे पूरे समझौते का उल्लंघन माना जाएगा। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी सख्त लहजे में कहा कि वे अपने लेबनानी भाइयों को अकेला नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने इजरायल की घुसपैठ को “धोखेबाजी” करार देते हुए चेतावनी दी कि यदि उकसावे वाली कार्रवाई जारी रही, तो बातचीत बेमानी हो जाएगी और ईरान फिर से पलटवार के लिए तैयार है।
ईरान-अमेरिका संघर्षविराम के महज 24 घंटों के भीतर लेबनान ने पिछले तीन दशकों का सबसे भयावह मंजर देखा है। इजरायली लड़ाकू विमानों ने लेबनान के विभिन्न हिस्सों में भीषण बमबारी की, जिसमें अब तक 254 लोगों के मारे जाने और 1,100 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। अस्पतालों में घायलों की भीड़ और मलबे में तब्दील हुई इमारतें इस हमले की भीषणता की गवाही दे रही हैं। इजरायल का दावा है कि ये हमले केवल ईरान समर्थित लड़ाकों के ठिकानों को नष्ट करने के लिए किए गए थे, लेकिन जमीनी हकीकत आम नागरिकों के भारी नुकसान की ओर इशारा कर रही है।
लेबनान में बढ़ता रक्तपात यह साबित करता है कि अधूरा युद्धविराम कभी भी स्थाई शांति नहीं ला सकता। पाकिस्तान की मध्यस्थता और अमेरिका की कूटनीति अब अग्निपरीक्षा के दौर में है। यदि लेबनान को तुरंत इस समझौते का हिस्सा नहीं बनाया गया, तो ईरान और इजरायल के बीच फिर से सीधी जंग छिड़ने का खतरा बढ़ जाएगा। विश्व की नजरें अब इस्लामाबाद और वॉशिंगटन पर टिकी हैं कि क्या वे इस सीजफायर को टूटने से बचा पाएंगे या लेबनान की धरती एक बार फिर महाशक्तियों के वर्चस्व की जंग का अखाड़ा बनी रहेगी।
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