Israel Day of Disruption
Israel Day of Disruption: इजरायल के इतिहास में मंगलवार, 10 फरवरी का दिन एक बड़े बदलाव का गवाह बना। देश की आंतरिक सुरक्षा और खासकर अरब समुदायों में बेकाबू होते संगठित अपराध के खिलाफ देशभर में ‘नेशनल डे ऑफ डिस्रप्शन’ (National Day of Disruption) मनाया गया। इस विरोध प्रदर्शन की सबसे खास और ऐतिहासिक बात यह रही कि पहली बार अरब मूल के नागरिक और यहूदी समुदाय के लोग एक साथ कंधे से कंधा मिलाकर सरकार के खिलाफ सड़कों पर उतरे। यह आंदोलन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि असुरक्षा की भावना से जूझ रहे नागरिकों का सामूहिक आक्रोश था।
विरोध की लहर जाफा के प्रसिद्ध क्लॉक स्क्वायर से शुरू हुई और देखते ही देखते इसने यरूशलम, बीर-शेवा, लोद, तामरा और हाइफा जैसे प्रमुख शहरों को अपनी चपेट में ले लिया। तेल अवीव में प्रदर्शनकारियों ने अपना रौद्र रूप दिखाते हुए अयालोन राजमार्ग की दक्षिणी लेन को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। करीब आधे घंटे तक देश की इस मुख्य जीवनरेखा पर यातायात ठप रहा। यरूशलम के प्रवेश द्वार पर भी भारी विरोध देखा गया, जहाँ प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और सात लोगों को हिरासत में लिया।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी बात सरकार तक पहुँचाने के लिए बेहद सांकेतिक और प्रभावशाली तरीका अपनाया। तेल अवीव और हाइफा जैसे शहरों में स्थित सार्वजनिक फव्वारों के पानी में लाल रंग डाल दिया गया। यह लाल रंग अरब समुदायों में प्रतिदिन बह रहे बेगुनाहों के खून का प्रतीक था। पुलिस ने इस कृत्य को सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाना माना और तेल अवीव से एक 60 वर्षीय बुजुर्ग महिला सहित कई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया। यह ‘लाल फव्वारा’ पूरे दिन सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना रहा।
हाइफा में आयोजित विशाल रैली में पूर्व सांसद और उच्च अरब निगरानी समिति के अध्यक्ष जमाल जाहल्का ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सीधे निशाने पर लिया। उन्होंने वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्वीर की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्हें तुरंत पद से हटाने की मांग की। जाहल्का ने भावुक होते हुए कहा कि अरब नागरिक अपने ही देश में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सड़कों पर पैदा किया गया यह व्यवधान उस ‘कड़वी हकीकत’ का आईना है, जिसे अरब समुदाय हर दिन झेलता है।
आंदोलन के मुख्य आयोजक समूह ‘स्टैंडिंग टुगेदर’ ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 की शुरुआत के महज 40 दिनों के भीतर ही अरब कस्बों में आपराधिक हिंसा के कारण 38 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। इससे पहले, वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 252 हत्याएं दर्ज की गई थीं, जो इजरायल के इतिहास का सबसे काला आंकड़ा माना जाता है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार और पुलिस प्रशासन आपराधिक नेटवर्कों को तोड़ने और अवैध हथियारों की तस्करी रोकने में पूरी तरह विफल रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य गुस्सा इस बात पर है कि अरब बहुल इलाकों में अवैध हथियारों की भरमार हो गई है, लेकिन सरकार इसे जब्त करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। संगठित अपराध की जड़ें इतनी गहरी हो गई हैं कि आम नागरिक अब दिन-दहाड़े होने वाली गोलीबारी के बीच जीने को मजबूर हैं। आयोजकों का कहना है कि जब तक सरकार इन अपराध सिंडिकेट्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई शुरू नहीं करती, तब तक इस तरह के विरोध प्रदर्शन जारी रहेंगे। यह आंदोलन अब इजरायल की घरेलू राजनीति का केंद्र बिंदु बन चुका है।
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