Pakistan Israel Conflict
Pakistan Israel Conflict : ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान द्वारा प्रस्तावित ‘अस्थायी युद्धविराम’ की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस बीच इजरायल ने पाकिस्तान की भूमिका पर कड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इजरायल ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ द्वारा दी गई एक बेहद विवादित और आपत्तिजनक टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा की है। इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच एक “निष्पक्ष मध्यस्थ” होने की योग्यता खो चुका है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जारी एक आधिकारिक बयान में इजरायल ने कहा कि विनाश का आह्वान करने वाली सरकार से शांति की उम्मीद नहीं की जा सकती।
इजराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने गुरुवार शाम को जारी अपने संदेश में पाकिस्तान सरकार को आड़े हाथों लिया। इजरायल का कहना है कि एक तरफ पाकिस्तान वैश्विक मंच पर शांतिदूत बनने का नाटक कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके शीर्ष मंत्री इजरायल के अस्तित्व को मिटाने की बात कर रहे हैं। बयान में कहा गया, “पाकिस्तान के रक्षा मंत्री द्वारा इजरायल के खिलाफ विनाश का आह्वान करना न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि यह किसी भी सभ्य समाज में बर्दाश्त करने योग्य नहीं है।” इजरायल ने संकेत दिया कि पाकिस्तान की यह दोहरी नीति मध्य पूर्व में शांति के प्रयासों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
विवाद की जड़ पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का वह सोशल मीडिया पोस्ट है, जिसमें उन्होंने इजरायल के खिलाफ बेहद तल्ख भाषा का इस्तेमाल किया। आसिफ ने अपनी पोस्ट में इजरायल को ‘बुरा’ और ‘मानवता के लिए अभिशाप’ करार दिया। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि यूरोपीय यहूदियों से छुटकारा पाने के लिए फिलिस्तीनी भूमि पर एक “कैंसर जैसे राज्य” की स्थापना की गई थी। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी है, क्योंकि यह ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान 11 अप्रैल (शनिवार) को एक महत्वपूर्ण शांति वार्ता की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है।
ख्वाजा आसिफ ने अपने बयान में इजरायल पर गाजा, ईरान और अब लेबनान में नरसंहार करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि निर्दोष नागरिकों का रक्तपात लगातार जारी है और दुनिया खामोश है। आसिफ ने बेहद आक्रामक लहजे में कहा, “मैं आशा और प्रार्थना करता हूं कि जिन लोगों ने इस राज्य की स्थापना की, वे नरक में जलें।” उनके इस बयान को केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि खुले तौर पर यहूदी-विरोधी (Anti-Semitic) माना जा रहा है। पाकिस्तान के भीतर भी इस बयान को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसने इस्लामाबाद की छवि को नुकसान पहुँचाया है।
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी इस मामले पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। उन्होंने ख्वाजा आसिफ के दावों को “यहूदी-विरोधी रक्तपात का आरोप” (Blood Libel) करार देते हुए इसकी घोर निंदा की। सार ने कहा कि एक तरफ पाकिस्तान मध्यस्थता के जरिए अपनी वैश्विक साख सुधारना चाहता है, और दूसरी तरफ उसके मंत्री नफरत फैलाने वाले भाषण दे रहे हैं। इजरायल का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से यह स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान किसी भी बातचीत में तटस्थ नहीं रह सकता, क्योंकि उसकी विचारधारा पक्षपातपूर्ण है।
पाकिस्तान वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम के लिए जमीन तैयार कर रहा है। शनिवार को होने वाली इस शांति वार्ता पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी थीं, लेकिन अब इजरायल के कड़े विरोध ने अमेरिका के लिए भी स्थिति असहज कर दी है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता इसी तरह के बयान देते रहे, तो पश्चिमी देश पाकिस्तान के नेतृत्व वाली किसी भी वार्ता से खुद को दूर कर सकते हैं। अब देखना यह होगा कि क्या पाकिस्तान सरकार अपने रक्षा मंत्री के बयान पर कोई सफाई देती है या शांति मध्यस्थता का यह प्रयास विवादों की भेंट चढ़ जाएगा।
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