Gattuso resigns
Gattuso resigns : चार बार की विश्व चैंपियन रही इटली की फुटबॉल टीम के लिए समय का चक्र एक बार फिर क्रूर साबित हुआ है। बोस्निया-हर्जेगोविना के खिलाफ टाईब्रेकर में मिली शर्मनाक हार ने इटली के आगामी वर्ल्ड कप में खेलने के सपनों को चकनाचूर कर दिया है। यह लगातार तीसरी बार है जब ‘अज़ुरी’ (इटली की नेशनल टीम) विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने में विफल रही है। इस ऐतिहासिक असफलता ने न केवल फुटबॉल जगत को स्तब्ध कर दिया है, बल्कि इटली के प्रशंसकों के बीच भारी रोष पैदा कर दिया है। हार के तुरंत बाद कोच जेननारो गैटूसो के भविष्य को लेकर अटकलें तेज थीं, जिस पर विराम लगाते हुए अब उन्होंने अपने पद से हटने का औपचारिक ऐलान कर दिया है।
शुरुआत में भविष्य के सवालों पर चुप्पी साधने वाले जेननारो गैटूसो ने आखिरकार भारी मन से पद छोड़ने का फैसला किया। उन्होंने अपने बयान में कहा, “बहुत भारी दिल के साथ मैंने नेशनल टीम के कोच का पद त्यागने का निर्णय लिया है। हम एक स्पष्ट लक्ष्य के साथ मैदान में उतरे थे, लेकिन दुर्भाग्यवश हम उसे हासिल करने में पूरी तरह विफल रहे।” गैटूसो ने स्वीकार किया कि टीम की इस विफलता की नैतिक जिम्मेदारी उनकी है। इटैलियन फुटबॉल फेडरेशन (FIGC) ने पुष्टि की है कि यह इस्तीफा आपसी सहमति से हुआ है। फेडरेशन ने नेशनल टीम के प्रति गैटूसो के समर्पण, अटूट निष्ठा और जुनून के लिए उन्हें धन्यवाद देते हुए उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
इटली की इस हार का असर केवल कोचिंग स्टाफ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर फुटबॉल प्रशासन की चोटी तक गया है। प्रशंसकों और मीडिया की तीखी आलोचना के भारी दबाव के बीच, टीम के जनरल मैनेजर गैब्रिएल ग्रेविना और महान गोलकीपर जियानलुइगी बफ़न ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। इन दोनों दिग्गजों ने इटैलियन फुटबॉल फेडरेशन के नेतृत्व से हटकर यह साफ कर दिया है कि इटली फुटबॉल को अब जमीनी स्तर से बड़े बदलावों की जरूरत है। एक साथ इतने बड़े नामों के हटने से इटली का फुटबॉल ढांचा वर्तमान में पूरी तरह नेतृत्व विहीन नजर आ रहा है, जो आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकता है।
एक ओर जहां इटली की टीम मैदान पर संघर्ष कर रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक मोर्चे पर भी मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। UEFA ने इटली को एक बार फिर सख्त चेतावनी जारी की है। गौरतलब है कि इटली को तुर्की के साथ मिलकर Euro 2032 की मेजबानी करनी है। हालांकि, स्टेडियमों की जर्जर हालत और विकास कार्यों में देरी को लेकर UEFA खुश नहीं है। UEFA के प्रेसिडेंट एलेक्जेंडर सेफरिन ने स्पष्ट लहजे में कहा है कि यदि इटली के स्टेडियमों का समय रहते और ठीक ढंग से नवीनीकरण (Renovation) नहीं किया गया, तो इटली में Euro 2032 का आयोजन मुमकिन नहीं होगा। यह चेतावनी इटली के लिए ‘कोढ़ में खाज’ जैसी साबित हो रही है।
इटली के फुटबॉल इतिहास में यह दौर सबसे काले अध्यायों में से एक माना जा रहा है। लगातार तीन वर्ल्ड कप से बाहर रहना किसी भी फुटबॉल प्रेमी देश के लिए असहनीय है। अब सवाल यह उठता है कि गैटूसो के जाने के बाद टीम की कमान कौन संभालेगा और क्या नया नेतृत्व टीम की खोई हुई प्रतिष्ठा वापस ला पाएगा? इटली को न केवल एक नया कोच ढूंढना होगा, बल्कि UEFA की शर्तों को पूरा करने के लिए अपने खेल बुनियादी ढांचे में भारी निवेश भी करना होगा। आगामी कुछ महीने इटैलियन फुटबॉल की दिशा और दशा तय करेंगे, जहां उन्हें शून्य से शुरुआत कर फिर से ‘विश्व चैंपियन’ वाली छवि गढ़नी होगी।
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