IUML Kingmaker 2026
IUML Kingmaker 2026 : हाल ही में संपन्न हुए 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणामों ने दक्षिण भारत की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। इस चुनाव में ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग’ (IUML) एक शक्तिशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरी है। केरल और तमिलनाडु जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में पार्टी अब ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आ गई है। चुनावी आंकड़ों और गठबंधन की स्थिति को देखते हुए यह स्पष्ट है कि इन दोनों राज्यों में IUML के समर्थन के बिना किसी भी गठबंधन के लिए सरकार बनाना लगभग नामुमकिन है। केरल में जहां पार्टी कांग्रेस के साथ सत्ता में वापसी की ओर है, वहीं तमिलनाडु में यह नए समीकरणों को जन्म दे रही है।
केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत का जादुई आंकड़ा 71 है। चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, कांग्रेस इस बार 63 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन वह बहुमत के आंकड़े से अभी भी दूर है। यहां IUML ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 22 सीटों पर जीत हासिल की है और उसे करीब 23 लाख वोट मिले हैं। ऐसे में कांग्रेस नीत गठबंधन के लिए IUML की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो गई है। पार्टी की इस जीत ने राज्य की राजनीति में मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधित्व और संगठन की पकड़ को एक बार फिर साबित कर दिया है।
तमिलनाडु में भी राजनीतिक परिदृश्य काफी दिलचस्प हो गया है। यहां की 234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। अभिनेता विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) को 107 सीटों पर जीत मिली है। टीवीके अब सत्ता के करीब पहुंचने के लिए कांग्रेस और 2 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली मुस्लिम लीग के विधायकों पर निर्भर है। तमिलनाडु में IUML को करीब 1.42 लाख वोट मिले हैं। यह छोटी लेकिन निर्णायक जीत पार्टी को राज्य की सत्ता नीति निर्धारित करने का बड़ा अवसर प्रदान करती है।
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग कोई नई पार्टी नहीं है; यह 1948 से ही दक्षिण की सियासत में सक्रिय है। 1951 में भारतीय संविधान को अपनाने वाली इस पार्टी ने हमेशा खुद को मुख्यधारा की राजनीति से जोड़े रखा है। ‘सीढ़ी’ चुनाव चिन्ह वाली इस पार्टी के पहले अध्यक्ष मुहम्मद इस्माइल थे और बाद में जीएम बनाथवाला जैसे मुखर नेताओं ने इसे राष्ट्रीय पहचान दिलाई। वर्तमान में केएम कादर मोहिदीन इसके अध्यक्ष हैं। पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में भी अपनी मजबूती दिखाते हुए 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जो इसके बढ़ते राष्ट्रीय कद को दर्शाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि IUML का बढ़ता प्रभाव कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन के लिए रणनीतिक रूप से बहुत फायदेमंद है। अब तक राष्ट्रीय स्तर पर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM गठबंधन का खेल बिगाड़ती रही है, जैसा बिहार और महाराष्ट्र के चुनावों में देखा गया। ओवैसी लगातार मुस्लिम हिस्सेदारी के मुद्दे पर कांग्रेस को घेरते रहे हैं। ऐसे में IUML का उदय कांग्रेस को एक ऐसा सहयोगी प्रदान करता है जो मुस्लिम मतदाताओं के बीच मजबूत पैठ रखता है और गठबंधन के प्रति वफादार भी है।
भले ही पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में पार्टी को इस बार मात्र 5 हजार वोट मिले और बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन दक्षिण में इसकी सफलता ने एक मॉडल पेश किया है। आने वाले समय में उत्तर भारत और अन्य मुस्लिम बहुल इलाकों में ‘इंडिया’ गठबंधन ओवैसी के प्रभाव को कम करने के लिए IUML को आगे कर सकता है। पार्टी की संवैधानिक निष्ठा और गठबंधन के साथ चलने की नीति उसे एक भरोसेमंद साथी बनाती है, जो भविष्य की राजनीति में और अधिक सक्रिय भूमिका निभा सकती है।
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