Exit Poll Racket
Exit Poll Racket : बीते दिन देश के पांच प्रमुख चुनावी राज्यों—पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी—के एग्जिट पोल के नतीजे सामने आए। अधिकांश सर्वेक्षणों में पश्चिम बंगाल और असम में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की स्पष्ट जीत का अनुमान लगाया गया है। वहीं, तमिलनाडु में DMK गठबंधन, केरल में वामपंथी मोर्चे (LDF) और पुडुचेरी में बीजेपी समर्थित गठबंधन की सरकार बनने की संभावना जताई गई है। इन अनुमानों के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने इन आंकड़ों को सिरे से खारिज करते हुए एग्जिट पोल को एक ‘रैकेट’ करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सर्वे महज एक दिखावा हैं और जमीनी हकीकत से इनका कोई वास्ता नहीं है।
जयराम रमेश ने केवल एग्जिट पोल पर ही नहीं, बल्कि भारतीय चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने वर्तमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीके की आलोचना करते हुए उन्हें बेहद पक्षपाती बताया। रमेश ने कहा कि चुनाव आयोग के इतिहास में इतनी गिरावट पहले कभी नहीं देखी गई। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि वर्तमान नेतृत्व अपने पूर्ववर्तियों से भी कहीं अधिक एकतरफा निर्णय ले रहा है। कांग्रेस नेता के अनुसार, आयोग अब एक निष्पक्ष संस्था के बजाय सत्ता पक्ष के साथ मिलकर एक ‘खिलाड़ी’ की भूमिका निभा रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कांग्रेस इस बार केवल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों से ही नहीं, बल्कि स्वयं चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से भी संघर्ष कर रही है।
जयराम रमेश ने चुनाव आयोग के खिलाफ संसद में लाए गए महाभियोग प्रस्ताव का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने आयोग के खिलाफ नौ गंभीर आरोप लगाते हुए महाभियोग की पहल की थी। हालांकि, तकनीकी या राजनीतिक कारणों से यदि यह प्रस्ताव खारिज भी हो जाता है, तो कांग्रेस पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने संकल्प जताया कि विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए दोबारा नोटिस देंगे। रमेश ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक चुनाव की नहीं है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा और उनकी स्वायत्तता को बचाने की है।
संविधान और नागरिकों के अधिकारों पर चर्चा करते हुए जयराम रमेश ने एक महत्वपूर्ण मांग उठाई। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब ‘वोट देने के अधिकार’ को महज एक वैधानिक अधिकार (Statutory Right) न रखकर ‘मौलिक अधिकार’ (Fundamental Right) घोषित कर दिया जाए। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि संविधान निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले महान कलाकार नंदलाल बोस के परिवार का नाम तक मतदाता सूची से गायब होना इस व्यवस्था की विफलता का प्रमाण है। रमेश के अनुसार, जब तक वोट देना मौलिक अधिकार नहीं बनेगा, तब तक आम नागरिक अपनी राजनीतिक शक्ति का पूर्ण उपयोग नहीं कर पाएंगे।
अपने संबोधन के अंत में जयराम रमेश ने गृह मंत्री अमित शाह के पुराने बयानों पर निशाना साधा। उन्होंने शाह के बहुचर्चित ‘3-D’ फॉर्मूले—डिटेक्ट (Detect), डिलीट (Delete) और डिपोर्ट (Deport)—का उल्लेख करते हुए पूछा कि सरकार बताए कि अब तक कितने गैर-भारतीयों की पहचान हुई और कितनों को देश से निकाला गया? उन्होंने आरोप लगाया कि इस रणनीति की आड़ में वास्तविक भारतीय नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। जयराम रमेश ने चेतावनी दी कि आज देश में वोट देने का अधिकार खतरे में है और यदि समय रहते संवैधानिक संस्थाओं में सुधार नहीं हुआ, तो यह लोकतंत्र के लिए एक बड़ा संकट साबित होगा।
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