J&K Assembly Chaos
J&K Assembly Chaos : जम्मू-कश्मीर विधानसभा के बजट सत्र की शुरुआत शुक्रवार, 27 मार्च को बेहद तनावपूर्ण माहौल में हुई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जो देखते ही देखते एक बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गई। उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली नेशनल कांफ्रेंस (NC) और महबूबा मुफ्ती की पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) के विधायकों ने अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सदन में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। विधायकों ने ‘इजरायल मुर्दाबाद’ और ‘अमेरिका हाय-हाय’ के नारे लगाकर सदन की गरिमा को चुनौती दी। यह पहली बार है जब केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा में वैश्विक संघर्षों का इतना उग्र असर देखने को मिला है।
प्रदर्शन के दौरान नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी के विधायक सदन के वेल (Well) में उतर आए। उनके हाथों में ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई की तस्वीरें और बैनर थे। विशेष रूप से, एनसी विधायक तनवीर सादिक काले कपड़े पहनकर सदन पहुंचे थे और उनके माथे पर विरोध के प्रतीक के रूप में कुछ लिखा हुआ था। ये विधायक ईरान पर इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों का तर्क था कि वैश्विक शक्तियों का यह रुख मानवता के खिलाफ है, जबकि विपक्षी दल इसे सदन के कीमती समय की बर्बादी और तुष्टिकरण की राजनीति करार दे रहे थे।
विपक्ष के हंगामे के जवाब में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक भी पीछे नहीं रहे। बीजेपी विधायकों ने सदन में ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाकर माहौल को और गरमा दिया। जहां एक ओर कश्मीर केंद्रित दल अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अड़े थे, वहीं बीजेपी विधायकों ने स्थानीय मुद्दों को प्राथमिकता दी। उन्होंने ‘जम्मू को इंसाफ दो’ के पोस्टर लहराए और नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (NLU) की स्थापना की मांग को लेकर पुरजोर आवाज उठाई। सदन का नजारा ऐसा था कि एक तरफ वैश्विक राजनीति के नारे लग रहे थे और दूसरी तरफ क्षेत्रीय विकास की मांग हो रही थी।
हंगामा इतना बढ़ गया कि सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक एक-दूसरे के करीब आ गए और मामला धक्का-मुक्की तक पहुंच गया। नेशनल कांफ्रेंस, कांग्रेस और निर्दलीय विधायकों के साझा विरोध के सामने बीजेपी के विधायक डटे रहे। स्थिति को अनियंत्रित होता देख विधानसभा अध्यक्ष को मार्शल बुलाने पड़े। मार्शलों ने बीच-बचाव कर विधायकों को हाथापाई करने से रोका। सदन की मर्यादा तार-तार होते देख महज 20-25 मिनट की कार्यवाही के बाद ही सदन को आधे घंटे के लिए स्थगित करना पड़ा।
सदन के भीतर केवल इजरायल और ईरान का मुद्दा ही नहीं छाया रहा, बल्कि घरेलू राजनीति के सबसे बड़े चेहरों को लेकर भी जुबानी जंग हुई। बीजेपी विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में नारेबाजी की, जिसके जवाब में कांग्रेस और गठबंधन के विधायकों ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नारे लगाए। सदन के भीतर का यह नजारा किसी चुनावी रैली जैसा प्रतीत हो रहा था। विधायकों के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं ताकि 11:00 बजे दोबारा शुरू होने वाली कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से चल सके।
जम्मू-कश्मीर के बजट सत्र से जनता को उम्मीद थी कि यहां उनके बुनियादी मुद्दों जैसे बिजली, पानी और रोजगार पर चर्चा होगी। लेकिन सत्र के पहले ही दिन अंतरराष्ट्रीय संघर्षों और व्यक्तिगत नारों ने जनहित के मुद्दों को हाशिए पर धकेल दिया है। विधानसभा में जिस तरह से खामेनेई की तस्वीरें लहराई गईं और इजरायल विरोधी प्रदर्शन हुआ, उससे यह स्पष्ट है कि आगामी सत्र में भी राजनीतिक गतिरोध जारी रहने वाला है। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार बजट पर सार्थक चर्चा करा पाती है या यह सत्र हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा।
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