Jammu-Kashmir Earthquake: केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में रविवार, 12 अप्रैल की सुबह भूकंप के झटकों ने लोगों की नींद उड़ा दी। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के आंकड़ों के अनुसार, भूकंप का पहला झटका सुबह 4 बजकर 22 मिनट पर महसूस किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.6 मैग्नीट्यूड मापी गई। अभी लोग इस झटके से संभल ही रहे थे कि मात्र 10 मिनट बाद दूसरा भूकंप भी आया, जिसकी तीव्रता 3 मैग्नीट्यूड आंकी गई। इस भूकंप का केंद्र कटरा से लगभग 92 किलोमीटर दूर जमीन की गहराई में स्थित था। गनीमत यह रही कि तीव्रता बहुत अधिक नहीं थी, जिसके कारण जान-माल के किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन तड़के आए इन झटकों ने स्थानीय निवासियों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया।

अखनूर में कुदरत का दुर्लभ नजारा: टोरनेडो देख दहशत में आए लोग
भूकंप से कुछ घंटे पहले, शनिवार शाम को जम्मू के अखनूर इलाके में प्रकृति का एक बेहद दुर्लभ और डरावना रूप देखने को मिला। यहाँ अचानक आए एक टोरनेडो (चक्रवाती बवंडर) ने लोगों को हैरान कर दिया। मौसम विभाग के निदेशक डॉ. मुख्तार अहमद के अनुसार, यह घटना एक खुले मैदान में हुई और लगभग 10 मिनट तक जारी रही। धूल और मलबे का एक विशाल घूमता हुआ गुबार आसमान की ओर उठते देख इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस अधिकारियों ने पुष्टि की है कि चूंकि यह बवंडर खुले क्षेत्र में था, इसलिए किसी भी इमारत या व्यक्ति को क्षति नहीं पहुंची।
दहशत का मंजर: सुरक्षा के लिए घरों की ओर भागे निवासी
जैसे ही हवा का घूमता हुआ गुबार तेज हुआ और आसमान में धूल छा गई, अखनूर के लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार ऐसा नजारा देखा था। दहशत के कारण लोग अपने काम छोड़कर घरों के अंदर दुबक गए और सुरक्षित स्थानों की शरण ली। सोशल मीडिया पर इस अनोखी घटना के वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें हवा की शक्ति और उसके भयानक शोर को साफ सुना जा सकता है। यूजर्स इन वीडियो पर अपनी चिंता जता रहे हैं और इस बदलाव के पीछे के वैज्ञानिक कारणों की मांग कर रहे हैं।
मौसम विभाग का विश्लेषण: आखिर कैसे बना यह बवंडर?
डॉ. मुख्तार अहमद ने स्पष्ट किया कि जम्मू संभाग के लिए यह एक अत्यंत अनोखी मौसम संबंधी घटना थी। उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत ‘थंडरस्टॉर्म सेल्स’ से हुई एक तूफानी रेखा के रूप में हुई थी, जो परिस्थितियां अनुकूल होने के कारण जल्द ही टोरनेडो में तब्दील हो गई। हालांकि, पिछले वर्ष पंजाब के कुछ हिस्सों में ऐसी घटनाएं देखी गई थीं, लेकिन कश्मीर के संदर्भ में यह दुर्लभ है। अधिकारियों के मुताबिक, दिन की शुरुआत में आसमान पूरी तरह साफ था, लेकिन शाम करीब 4:45 बजे अचानक काले बादल छा गए, जिससे बिजली कड़कने और हल्की बारिश का दौर शुरू हुआ।
इंद्रधनुष की मुस्कान और कुदरत की अनिश्चितता
मौसम की इस उथल-पुथल के बीच शनिवार की शाम को एक सुखद नजारा भी देखने को मिला। जब बारिश का वेग कम हुआ और आसमान से काले बादल छंटने लगे, तब शहर के क्षितिज पर एक भव्य इंद्रधनुष दिखाई दिया। हालांकि, इंद्रधनुष की इस सुंदरता के कुछ घंटों बाद ही आए भूकंप ने लोगों को कुदरत की अनिश्चितता का अहसास करा दिया। स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस तरह की बेमौसम और दुर्लभ प्राकृतिक घटनाएं अब पर्वतीय क्षेत्रों में भी पैर पसार रही हैं।


















