Janjgir-Champa Rape case
Janjgir-Champa Rape case: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक बेहद चौंकाने वाली और विचलित करने वाली खबर सामने आई है। प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कानून और पुलिस की मुस्तैदी के दावों के बीच, एक जन प्रतिनिधि पर ही दुराचार का गंभीर आरोप लगा है। नवागढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव में सरपंच ने मर्यादाओं को ताक पर रखकर एक युवती को अपनी हवस का शिकार बनाया है। इस घटना ने न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी हड़कंप मचा दिया है।
समाज में महिलाओं और युवतियों के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के लिए सरकार ने रेप और छेड़छाड़ से जुड़े कानूनों को बेहद सख्त कर दिया है। बावजूद इसके, अपराधियों के हौसले पस्त होने का नाम नहीं ले रहे हैं। जांजगीर-चांपा की यह घटना दर्शाती है कि समाज में कुछ ‘दरिंदे’ आज भी कानून के खौफ से बेपरवाह होकर महिलाओं को अपना शिकार बना रहे हैं। खास तौर पर जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है।
मिली जानकारी के अनुसार, मामला नवागढ़ पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव का है। यहाँ की रहने वाली एक युवती ने अपनी आपबीती बताते हुए थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पीड़िता ने पुलिस को दिए बयान में आरोप लगाया है कि गांव के ही सरपंच ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया है। युवती की शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर लिया है और पीड़िता का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है।
इस मामले में सबसे हैरान करने वाला पहलू आरोपी की पृष्ठभूमि है। आरोपी सरपंच का नाम संतोष बताया जा रहा है, जो केरा गांव का प्रतिनिधि है। बताया जा रहा है कि वह कांग्रेस समर्थित जनप्रतिनिधि है। इतना ही नहीं, पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी का नाम इलाके की ‘गुंडा-बदमाश सूची’ में पहले से ही दर्ज है। एक आपराधिक छवि वाले व्यक्ति का सरपंच जैसे गरिमामय पद पर होना और फिर ऐसे जघन्य अपराध में संलिप्त पाया जाना, स्थानीय चयन प्रक्रिया और राजनीतिक संरक्षण पर बड़े सवाल खड़े करता है।
नवागढ़ पुलिस ने युवती की शिकायत पर विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। घटना के बाद से ही आरोपी सरपंच संतोष फरार बताया जा रहा है। पुलिस की अलग-अलग टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गांव में पुलिस बल की तैनाती भी की गई है ताकि किसी प्रकार का तनाव न फैले।
जैसे ही यह मामला सार्वजनिक हुआ, जिले में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी दल सत्ता पक्ष को घेरने की तैयारी में हैं, वहीं पीड़ित परिवार डरा हुआ है और न्याय की गुहार लगा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में भी भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि एक जनप्रतिनिधि ही सुरक्षित माहौल देने के बजाय ऐसी घिनौनी हरकत करेगा, तो बेटियां कहाँ सुरक्षित रहेंगी? अब सबकी नजरें पुलिस की कार्रवाई और आरोपी की गिरफ्तारी पर टिकी हैं।
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