Janjgir Couple Suicide: छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक ऐसी दुखद खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। शिवरीनारायण थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम धरदेई में एक दंपत्ति ने अपने इकलौते बेटे की मौत के गम में आत्मघाती कदम उठाते हुए अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घर के आंगन में नीम के पेड़ से दोनों के शव लटकते मिलने के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट और एक वीडियो संदेश भी मिला है, जो इस त्रासदी के पीछे छिपे गहरे दर्द को बयां कर रहा है।

नीम के पेड़ से लटकते मिले पति-पत्नी के शव
घटना सोमवार सुबह की है जब ग्रामीणों और पड़ोसियों ने कृष्णा पटेल और उनकी पत्नी रमा बाई के शवों को उनके ही घर के आंगन में स्थित नीम के पेड़ पर साड़ी के फंदे से लटकते हुए देखा। यह दृश्य देखते ही गांव में हड़कंप मच गया और तुरंत राहौद पुलिस चौकी को इसकी सूचना दी गई। मौके पर पहुँची पुलिस ने पाया कि पास की दीवार के सहारे दंपत्ति ने फंदा लगाया था। पुलिस ने शवों को नीचे उतारकर पंचनामा तैयार किया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
सुसाइड नोट में छलका इकलौते पुत्र की मौत का गम
राहौद चौकी प्रभारी सत्यम चौहान ने बताया कि तलाशी के दौरान घटनास्थल से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है। इस पत्र में दंपत्ति ने अपने दिल का दर्द साझा करते हुए लिखा है कि वे अपने 22 वर्षीय इकलौते पुत्र आदित्य पटेल की असामयिक मृत्यु से बुरी तरह टूट चुके थे। ज्ञात हो कि लगभग एक वर्ष पहले एक सड़क हादसे में आदित्य की मौत हो गई थी। पुत्र की मृत्यु के बाद से ही दोनों पति-पत्नी गहरे सदमे और अवसाद में थे। सुसाइड नोट के अनुसार, बेटे के बिना जीवन उन्हें व्यर्थ लगने लगा था, जिसके कारण उन्होंने सामूहिक रूप से यह खौफनाक कदम उठाया।
मौत से पहले बनाया वीडियो: क्लेम राशि को लेकर दी वसीयत
इस आत्मघाती कदम को उठाने से पहले कृष्णा पटेल और रमा बाई ने एक वीडियो संदेश भी रिकॉर्ड किया था। यह वीडियो उनके इरादों की गंभीरता और योजना को दर्शाता है। वीडियो में दंपत्ति अपने वकील को संबोधित करते हुए नजर आ रहे हैं। उन्होंने संदेश दिया कि पुत्र आदित्य पटेल की सड़क दुर्घटना के बाद मिलने वाली बीमा क्लेम की राशि उनके दोनों बड़े भाइयों—खोल बहरा पटेल और जलबहरा पटेल को दी जाए। उन्होंने अपनी संपत्ति और क्लेम के पैसे को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए ताकि उनकी मृत्यु के बाद परिवार में कोई विवाद न हो।
पूरे धरदेई गांव में पसरा सन्नाटा और गम का माहौल
इस घटना के बाद से धरदेई गांव में चूल्हा तक नहीं जला है। ग्रामीणों का कहना है कि बेटा खोने के बाद से यह दंपत्ति किसी से ज्यादा बात नहीं करता था और गुमसुम रहता था। इकलौते वारिस के चले जाने का दुख उन पर इस कदर हावी हुआ कि उन्होंने दुनिया को अलविदा कहना ही बेहतर समझा। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या पिछले कुछ दिनों में कोई ऐसी तात्कालिक घटना हुई थी जिसने उन्हें इस चरम निर्णय तक पहुँचाया।
मानसिक स्वास्थ्य और अपनों का साथ: एक सबक
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा सबक है कि अपनों को खोने का गम किसी व्यक्ति को किस हद तक मानसिक रूप से कमजोर कर सकता है। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसे मामलों में परिवार और समाज की भूमिका अहम हो जाती है। यदि समय रहते पीड़ित परिवार की काउंसलिंग की जाती या उन्हें अकेलेपन से बाहर निकाला जाता, तो शायद इन दो मासूम जिंदगियों को बचाया जा सकता था। फिलहाल, पुलिस मामले के सभी पहलुओं, विशेषकर वीडियो और सुसाइड नोट की प्रामाणिकता की जांच कर रही है।
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