Jashpur Murder Case: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ दो लापता युवकों की मौत की गुत्थी को पुलिस ने सुलझा लिया है। जिसे शुरुआत में एक साधारण गुमशुदगी का मामला माना जा रहा था, वह अंततः एक जघन्य अपराध और साक्ष्य छिपाने की साजिश निकला। जशपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महज चार दिनों के भीतर न केवल शवों को बरामद किया, बल्कि इस पूरी घटना के पीछे के मुख्य कारणों और आरोपियों का भी पर्दाफाश कर दिया है। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल पैदा कर दिया है।
Jashpur Murder Case: लापता युवकों की तलाश और पुलिस की सक्रियता
घटना की शुरुआत 12 दिसंबर 2025 को हुई, जब थाना तुमला के चौकी कोल्हेनझरिया क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम सेरमाटोली निवासी विलियम कुजूर (31 वर्ष) और दिलीप राम खड़िया (23 वर्ष) अचानक रहस्यमयी परिस्थितियों में लापता हो गए। जब काफी खोजबीन के बाद भी दोनों का कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल जांच दल का गठन किया और संदिग्धों से पूछताछ शुरू की। मुखबिरों से मिले इनपुट और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस का शक ग्राम डांगबंधी निवासी आयटू लोहार पर गया, जिसे हिरासत में लेकर कड़ी पूछताछ की गई।
Jashpur Murder Case: शिकार के लिए बिछाया गया मौत का जाल: ऐसे हुई वारदात
पुलिस की सघन पूछताछ के सामने आरोपी आयटू लोहार ज्यादा देर तक टिक नहीं सका और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसने अपने चार अन्य साथियों के साथ मिलकर जंगली सूअर का शिकार करने की योजना बनाई थी। इसके लिए उन्होंने जंगल के पास स्थित एक अरहर के खेत में अवैध रूप से बिजली के नंगे तारों का जाल बिछाया था। दुर्भाग्यवश, उसी रात विलियम और दिलीप जंगल की ओर गए थे और अंधेरे के कारण खेत में बिछाए गए हाई-वोल्टेज करंट की चपेट में आ गए। करंट इतना शक्तिशाली था कि दोनों युवकों की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई।
साक्ष्य मिटाने की साजिश: डेम में फेंके गए शव
हादसे के बाद आरोपी घबरा गए, लेकिन उन्होंने पुलिस को सूचित करने के बजाय अपराध को छिपाने का घातक रास्ता चुना। साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से आरोपियों ने दोनों मृतकों के शवों को बोरों में भरा और उन्हें ठिकाने लगाने के लिए ‘कागजपुड़ा डेम’ ले गए। वहाँ उन्होंने भारी पत्थरों के सहारे शवों को पानी में फेंक दिया ताकि वे सतह पर न आ सकें। आरोपी आयटू की निशानदेही पर पुलिस की टीम और गोताखोरों ने डेम से दोनों शव बरामद किए। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दोनों युवकों की मृत्यु बिजली के झटके (इलेक्ट्रोक्यूशन) के कारण हुई थी।
कानूनी कार्रवाई: एक गिरफ्तार, चार फरार आरोपियों की तलाश
पुलिस ने इस मामले में कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मुख्य आरोपी आयटू लोहार को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने सभी पांचों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या), 238 (साक्ष्य छिपाना) और 3(5) (साझा इरादा) के तहत मामला दर्ज किया है। एएसपी अनिल कुमार सोनी ने बताया कि फरार चल रहे अन्य चार आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की अलग-अलग टीमें लगातार छापेमारी कर रही हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही सभी सलाखों के पीछे होंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध करंट का खतरा और प्रशासन की चेतावनी
इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में जंगली जानवरों के शिकार के लिए बिजली के तारों के अवैध उपयोग पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकार की यह लालसा अक्सर इंसानी जानों पर भारी पड़ती है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों को चेतावनी दी है कि खेतों या जंगलों में इस तरह के बिजली के जाल बिछाना न केवल गैर-कानूनी है, बल्कि इसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। पुलिस ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना तुरंत दें ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
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