J&K Terror Threat : जम्मू-कश्मीर में बाहरी मजदूरों को लेकर सोशल मीडिया पर कथित तौर पर एक नया धमकी भरा संदेश सामने आया है। यह संदेश यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) के नाम से प्रसारित होने का दावा किया जा रहा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, ULC को प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का कथित ऑनलाइन प्रॉक्सी फ्रंट माना जाता है। नए संदेश में जम्मू-कश्मीर में काम करने वाले बाहरी मजदूरों को निशाना बनाते हुए गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी गई है।
स्थायी रूप से बसने के आरोप पर निशाना
कथित संदेश में बाहरी मजदूरों पर जम्मू-कश्मीर में स्थायी रूप से बसने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। इसमें उनकी सामाजिक या व्यक्तिगत स्थिति में किसी तरह का भेदभाव किए बिना उन्हें हिंसा का सामना करने की धमकी दी गई है। सुरक्षा एजेंसियां इस संदेश को गंभीरता से लेते हुए इसके स्रोत, प्रसार और इसके पीछे मौजूद लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
बाहरी लोगों को लेकर आपत्तिजनक दावे
कथित ULC संदेश में दावा किया गया है कि दूसरे राज्यों से आए कुछ लोग शुरुआत में आर्थिक मदद या मजदूरी के लिए क्षेत्र में पहुंचे थे, लेकिन अब वे निवास का अधिकार हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। संदेश में उनके कथित विरोध प्रदर्शनों को लेकर भी आपत्तिजनक दावे किए गए हैं। साथ ही स्थानीय लोगों से ऐसे लोगों का विरोध करने की अपील की गई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के संदेशों का उद्देश्य आम लोगों के बीच भय और तनाव का माहौल पैदा करना हो सकता है।
जुलाई-अगस्त से जारी धमकियों का सिलसिला
सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, सामने आया यह संदेश ULC के नाम से पहले जारी किए गए कथित पोस्टरों और ऑनलाइन धमकियों की कड़ी का हिस्सा हो सकता है। जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान भी संगठन के नाम से कई धमकी भरे संदेश सामने आने की बात कही गई थी। इन संदेशों में जनसंख्या, क्षेत्रीय पहचान और कथित कब्जे जैसे संवेदनशील मुद्दों को उठाकर लोगों में डर पैदा करने की कोशिश की गई थी।
पहले कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को बनाया निशाना
ULC के नाम से सामने आए पिछले धमकी संदेशों में प्रधानमंत्री के पुनर्वास पैकेज के तहत जम्मू-कश्मीर में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को कथित तौर पर निशाना बनाया गया था। इन संदेशों में कुछ लोगों के नाम, पते और वाहनों से जुड़ी निजी जानकारियां तक सार्वजनिक किए जाने का दावा किया गया था। सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे पोस्टरों को मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति के तौर पर देखा था।
बाहरी मजदूरों में पहले से डर का माहौल
जम्मू-कश्मीर में बाहरी मजदूरों के बीच पहले से ही सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। जुलाई में कुलगाम जिले में ईंट भट्ठे पर काम करने वाले दो मजदूरों की लक्षित हत्या के बाद यह डर और बढ़ गया था। घाटी में देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में मौसमी मजदूर रोजगार के लिए पहुंचते हैं। इनमें निर्माण, ईंट भट्ठों, बागवानी और अन्य क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिक शामिल हैं।
सरकार और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क
ULC के नाम से सामने आने वाले धमकी भरे पोस्टरों और संदेशों को लेकर जम्मू-कश्मीर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला समेत शीर्ष अधिकारियों ने पहले भी ऐसे संदेशों को गंभीर चिंता का विषय बताया है। अधिकारियों ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को इन मामलों की गहन जांच करने तथा संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
ऑनलाइन धमकी की सच्चाई की जांच जारी
फिलहाल एजेंसियां नए संदेश की प्रामाणिकता और इसके पीछे सक्रिय नेटवर्क की जांच कर रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि संदेश का प्रसार किस उद्देश्य से किया गया और क्या इसके पीछे किसी आतंकी संगठन का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष नेटवर्क है। सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता आम नागरिकों और मजदूरों में भरोसा बनाए रखना तथा किसी भी संभावित हिंसा को रोकना है।
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