JNU Controversy
JNU Controversy: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। सोमवार को परिसर में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक व अमर्यादित नारे लगाए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए जेएनयू प्रशासन ने दिल्ली पुलिस में मामला दर्ज करा दिया है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि परिसर को नफरत फैलाने का अड्डा नहीं बनने दिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जेएनयू प्रशासन ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है। प्रशासन ने कहा कि विश्वविद्यालय पढ़ाई, नए विचारों के आदान-प्रदान और नवाचार (Innovation) का केंद्र होते हैं। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार संविधान ने सबको दिया है, लेकिन इसकी आड़ में हिंसा भड़काना, कानून तोड़ना या देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देना किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि दोषी पाए जाने वाले छात्रों को तत्काल प्रभाव से निलंबन या विश्वविद्यालय से निष्कासन जैसी सजा भुगतनी होगी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह विरोध प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ आयोजित किया गया था, जिसमें दिल्ली हिंसा मामले के आरोपी शरजील इमाम और उमर खालिद की जमानत याचिका को नामंजूर कर दिया गया था। इस फैसले से नाराज कुछ छात्र समूहों ने परिसर में रैली निकाली। दावा किया जा रहा है कि इसी प्रदर्शन के दौरान भीड़ में शामिल कुछ छात्रों ने उग्र और देशविरोधी मानसिकता को दर्शाने वाली नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे परिसर का माहौल तनावपूर्ण हो गया।
प्रदर्शनकारी छात्रों पर आरोप है कि उन्होंने न केवल न्यायपालिका और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ नारेबाजी की, बल्कि प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और आरएसएस के विरुद्ध हिंसा को उकसाने वाले अमर्यादित शब्द कहे। जेएनयू में इस तरह की घटना पहली बार नहीं हुई है; इससे पहले साल 2016 और 2020 में भी इसी तरह के आपत्तिजनक नारों को लेकर विश्वविद्यालय सुर्खियों में रहा था। वर्तमान घटना ने पुराने जख्मों को फिर से हरा कर दिया है और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर दिल्ली के गृहमंत्री आशीष सूद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने नारेबाजी की इस घटना को अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक बताया। गृहमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र हमें असहमति जताने का पूरा अधिकार देता है, लेकिन इस अधिकार का उपयोग व्यक्तिगत गाली-गलौज या वैचारिक हिंसा फैलाने के लिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार और पुलिस ऐसी अराजक गतिविधियों पर पैनी नजर रख रही है।
गृहमंत्री आशीष सूद ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री और गृहमंत्री के साथ किसी भी दल या विचारधारा की लड़ाई नीतियों के स्तर पर हो सकती है। लोकतंत्र में शिक्षा नीति, वित्तीय फैसलों और जनहित के मुद्दों पर तीखी बहस होनी चाहिए, लेकिन जो लोग देश को तोड़ने की साजिश रचते हैं या संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के खिलाफ हिंसा भड़काते हैं, उनके प्रति समाज और सरकार की कोई सहानुभूति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे अपनी ऊर्जा सकारात्मक चर्चाओं में लगाएं।
फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने जेएनयू प्रशासन की शिकायत पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। पुलिस प्रदर्शन के दौरान के वीडियो फुटेज खंगाल रही है ताकि आपत्तिजनक नारे लगाने वाले छात्रों की पहचान की जा सके। विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच समिति भी इस मामले की समानांतर जांच कर रही है। आने वाले दिनों में कुछ छात्रों पर बड़ी गाज गिरनी तय मानी जा रही है, क्योंकि प्रशासन इस बार “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाने के मूड में नजर आ रहा है।
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