Sadhvi Prem Baisa Death: राजस्थान के जोधपुर में प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की अचानक और संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। 28 जनवरी की शाम हुई इस घटना के बाद से ही उनके अनुयायियों में भारी आक्रोश और शोक व्याप्त है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जोधपुर पुलिस प्रशासन ने अब एक विशेष जाँच दल (SIT) का गठन किया है। इस उच्च स्तरीय जाँच का उद्देश्य साध्वी की मृत्यु के पीछे के असली कारणों और आश्रम में उस शाम हुई गतिविधियों की सच्चाई सामने लाना है।

एसीपी छवि शर्मा के नेतृत्व में एसआईटी का गठन
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए गठित एसआईटी की कमान एसीपी छवि शर्मा को सौंपी गई है। इस विशेष टीम में बोरानाडा थाना अधिकारी शकील और साइबर विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है। साइबर टीम की मदद से साध्वी के फोन रिकॉर्ड्स, आश्रम के सीसीटीवी फुटेज और हालिया संवादों की बारीकी से जांच की जाएगी। पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह एक संवेदनशील मामला है, इसलिए हर पहलू की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच सुनिश्चित की जा रही है।
पिता की शिकायत पर ‘अप्राकृतिक मौत’ का मामला दर्ज
प्रेम बाईसा के पिता ने पुलिस में अपनी बेटी की मृत्यु को लेकर गंभीर संदेह व्यक्त करते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पिता की इसी शिकायत के आधार पर जोधपुर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 194 के तहत ‘अप्राकृतिक मौत’ (Unnatural Death) का मुकदमा दर्ज किया है। परिजनों का आरोप है कि साध्वी स्वस्थ थीं और अचानक उनकी मौत होना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। पुलिस अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और विसरा जांच के परिणामों का इंतजार कर रही है ताकि मौत के सटीक कारणों का खुलासा हो सके।
इंजेक्शन लगने के चंद मिनटों बाद हुई मृत्यु
घटना वाले दिन यानी 28 जनवरी 2026 की शाम को जोधपुर के पाल गांव स्थित आश्रम में जो कुछ हुआ, वह बेहद रहस्यमयी है। सूत्रों के अनुसार, 23-25 वर्षीय साध्वी प्रेम बाईसा की तबीयत अचानक थोड़ी खराब हुई थी। इसके बाद आश्रम में एक स्थानीय कंपाउंडर को बुलाया गया। आरोप है कि कंपाउंडर ने साध्वी को एक इंजेक्शन लगाया, जिसके तुरंत बाद उनकी स्थिति गंभीर रूप से बिगड़ गई। उन्हें आनन-फानन में एक निजी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने शाम करीब 5:30 बजे उन्हें ‘ब्रॉट डेड’ (अस्पताल पहुंचने से पहले मृत) घोषित कर दिया।
अनुयायियों में शोक और संत समाज में उठते सवाल
साध्वी प्रेम बाईसा अपने ओजस्वी प्रवचनों और भजन गायिकी के लिए लाखों लोगों के बीच लोकप्रिय थीं। उनकी संदिग्ध मौत की खबर फैलते ही आश्रम के बाहर भक्तों की भारी भीड़ जमा हो गई। संत समाज ने भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की है। सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या वह कंपाउंडर अधिकृत था? उसे किसने बुलाया था? और उस इंजेक्शन में कौन सी दवा थी जिसने कुछ ही मिनटों में एक युवा साध्वी के प्राण ले लिए? इन सभी सवालों के जवाब अब एसआईटी को तलाशने हैं।
आश्रम की गतिविधियों पर पुलिस की पैनी नजर
एसआईटी अब पाल गांव स्थित आश्रम के अन्य सेवादारों और घटना के समय मौजूद लोगों से पूछताछ कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या पिछले कुछ दिनों से साध्वी किसी मानसिक तनाव में थीं या आश्रम के भीतर किसी प्रकार का विवाद चल रहा था। बोरानाडा पुलिस ने आश्रम के रजिस्टर और कुछ दस्तावेजों को भी अपने कब्जे में लिया है। आने वाले दिनों में एसआईटी की यह जांच जोधपुर की इस सबसे बड़ी रहस्यमयी मौत का पर्दाफाश कर सकती है।
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