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JP Infratech: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (Jaypee Infrastructure Limited) के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। एजेंसी ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) मनोज गौर को मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया है।ईडी की यह कार्रवाई कई महीनों से चल रही जांच का हिस्सा है, जिसमें पाया गया कि कंपनी ने हजारों घर खरीदारों से वसूले गए पैसे को गलत तरीके से अन्य खातों में स्थानांतरित किया। एजेंसी का आरोप है कि यह राशि प्रोजेक्ट के निर्माण में इस्तेमाल न होकर कर्ज चुकाने और अन्य कंपनियों को लाभ पहुंचाने में प्रयोग की गई।
जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड लंबे समय से विवादों में रही है। कंपनी ने नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्रों में कई हाउसिंग प्रोजेक्ट लॉन्च किए थे, जिनमें जेपी विश टाउन, जेपी एम्स्टरडम, और स्पोर्ट्स सिटी प्रोजेक्ट्स प्रमुख हैं।लेकिन समय पर निर्माण कार्य पूरा न होने और परियोजनाओं में लगातार देरी के कारण हजारों गृह खरीदारों को नुकसान झेलना पड़ा। कई लोगों ने कोर्ट और सरकारी एजेंसियों के पास शिकायतें दर्ज कराईं। इन्हीं शिकायतों के आधार पर ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत जांच शुरू की थी।
ईडी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने बैंक लोन और ग्राहकों के एडवांस भुगतान के रूप में हजारों करोड़ रुपये जुटाए, लेकिन इनका उपयोग तय उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया।जांच में यह भी पाया गया कि कुछ धनराशि को संबद्ध कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया गया, जिससे कृत्रिम घाटा दिखाया जा सके और निवेशकों व बैंकों को गुमराह किया जा सके।ईडी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया “लेयरिंग और डायवर्जन ऑफ फंड्स” का उदाहरण है जो कि मनी लॉन्ड्रिंग के दायरे में आता है।
जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ अब तक 30,000 से अधिक गृह खरीदार शिकायत दर्ज करा चुके हैं। इनमें से कई का कहना है कि उन्होंने एक दशक पहले फ्लैट बुक कराया था, लेकिन अभी तक उन्हें कब्जा नहीं मिला।कुछ परियोजनाओं में निर्माण कार्य बीच में ही बंद कर दिया गया, जबकि कंपनी ने खरीदारों से पूरी भुगतान राशि ले ली थी। इस कारण कई लोग कर्ज के बोझ और आवासीय संकट दोनों से जूझ रहे हैं।
मनोज गौर की गिरफ्तारी के बाद ईडी अब कंपनी के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों, निदेशकों और वित्तीय सलाहकारों से भी पूछताछ कर सकती है।एजेंसी ने यह भी संकेत दिया है कि जांच के दौरान कंपनी की अचल संपत्तियों और बैंक खातों को फ्रीज किया जा सकता है।साथ ही, बैंकिंग रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट और विदेशी लेनदेन की भी गहन जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि धन किस-किस माध्यम से ट्रांसफर हुआ।जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की ओर से जारी प्रारंभिक बयान में कहा गया है कि कंपनी ईडी की जांच में पूरा सहयोग कर रही है और किसी भी गलत कार्य में शामिल नहीं है।कंपनी ने यह भी दावा किया कि देरी का कारण आर्थिक मंदी, नियामकीय मंजूरियों में विलंब और महामारी से प्रभावित निर्माण कार्य रहा है।
जेपी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड पर ईडी की यह कार्रवाई देश के रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर एक बड़ा संदेश देती है।मनोज गौर की गिरफ्तारी के बाद उम्मीद की जा रही है कि एजेंसी उन निवेशकों और घर खरीदारों के लिए न्याय सुनिश्चित करेगी, जिनकी वर्षों की जमा पूंजी अधर में लटकी हुई है।अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में जेपी ग्रुप के अन्य प्रोजेक्ट्स और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ ईडी क्या कदम उठाती है और इस कार्रवाई का प्रभाव रियल एस्टेट उद्योग पर कितना व्यापक होता है।
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