Surya Dev Puja
Surya Dev Puja : हिंदू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ मास का धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष स्थान है। इस महीने की तपन और ऊर्जा साक्षात सूर्य देव का प्रतीक मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ज्येष्ठ माह के अधिपति स्वयं भगवान सूर्य हैं, इसलिए इस पूरे महीने में उनकी विशेष उपासना का विधान है। वर्ष 2026 में ज्येष्ठ माह का पहला रविवार अत्यंत शुभ संयोग लेकर आ रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो साधक ज्येष्ठ रविवार के दिन निष्ठापूर्वक सूर्य देव की आराधना करते हैं, उनकी कुंडली में सूर्य ग्रह बलवान होता है। सूर्य की मजबूती से व्यक्ति को जीवन में प्रशासनिक सफलता, समाज में पद-प्रतिष्ठा और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
ज्येष्ठ रविवार के दिन सूर्य देव को अर्घ्य देना सबसे सरल और प्रभावशाली उपाय माना गया है। यदि आप व्यस्तता के कारण प्रतिदिन सूर्य को जल नहीं चढ़ा पाते, तो इस पवित्र रविवार को यह कार्य अवश्य करें। अर्घ्य देने के लिए तांबे के पात्र का उपयोग करना श्रेष्ठ होता है। लोटे में शुद्ध जल भरें और उसमें लाल चंदन, कुमकुम, अक्षत (सादा चावल) और लाल रंग के पुष्प डालें। सूर्य की ओर मुख करके जल की धारा छोड़ते हुए ‘ॐ सूर्याय नमः’ या ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ का जाप करें। ध्यान रहे कि जल की धारा के बीच से सूर्य की किरणों के दर्शन करना शुभ माना जाता है।
रविवार के दिन आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करना साक्षात दिव्य ऊर्जा प्राप्त करने के समान है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब भगवान राम युद्ध क्षेत्र में थके हुए थे, तब महर्षि अगस्त्य ने उन्हें इसी स्तोत्र का उपदेश दिया था। ज्येष्ठ रविवार को इसका पाठ करने से करियर की बाधाएं दूर होती हैं और नौकरी में प्रमोशन के मार्ग प्रशस्त होते हैं। यह स्तोत्र शत्रुओं के भय को समाप्त करता है और व्यक्ति के भीतर नेतृत्व क्षमता विकसित करता है। पाठ के समय मन को एकाग्र रखना चाहिए और पूर्ण श्रद्धा के साथ सूर्य देव के विभिन्न नामों का स्मरण करना चाहिए।
ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी में दान-पुण्य का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस माह में जल दान को सर्वोत्तम दान की श्रेणी में रखा गया है। ज्येष्ठ रविवार के दिन राहगीरों के लिए प्याऊ लगवाना, ठंडा शरबत पिलाना या मटके का दान करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। इसके अतिरिक्त, सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने के लिए आप जरूरतमंदों को गुड़, गेहूं, तांबे के बर्तन और लाल रंग के वस्त्र भी दान कर सकते हैं। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान न केवल पितरों को तृप्त करता है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि का वास भी कराता है।
आदित्य हृदय स्तोत्र केवल एक स्तुति नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली कवच है। इसके विनियोग और ऋषियों के स्मरण के साथ पाठ शुरू करना चाहिए। स्तोत्र में सूर्य को ब्रह्मा, विष्णु, शिव और प्रजापति के रूप में वर्णित किया गया है, जो संपूर्ण जगत के रक्षक हैं। पाठ करते समय शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। सुबह स्नान के पश्चात सूर्योदय के समय इसका जाप करना सबसे उत्तम होता है। यदि संभव हो, तो रविवार के दिन नमक का त्याग करें और केवल फलाहार या सात्विक भोजन ग्रहण करें। ऐसा करने से सूर्य की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
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