K Kavitha New Party
K Kavitha New Party: तेलंगाना की राजनीति में आज उस समय एक ऐतिहासिक मोड़ आ गया जब भारत राष्ट्र समिति (BRS) के अध्यक्ष के. चंद्रशेखर राव की बेटी और विधान परिषद सदस्य (MLC) के. कविता ने सदन में अत्यंत भावुक भाषण दिया। अपने संबोधन के दौरान कविता कई बार फफक-फफक कर रो पड़ीं, जिससे सदन में सन्नाटा पसर गया। कविता का यह भावनात्मक विस्फोट उनके और उनकी पार्टी बीआरएस के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी का चरम था। सदन की कार्यवाही के बाद, वे सीधे तेलंगाना के शहीदों के स्मारक पहुंचीं और वहां माथा टेकने के बाद एक बड़ा राजनीतिक एलान कर दिया। कविता ने स्पष्ट किया कि अब वे अपनी एक नई स्वतंत्र राजनीतिक पार्टी लॉन्च करेंगी, जो तेलंगाना के लोगों के हितों के लिए काम करेगी।
के. कविता का अपनी पैतृक पार्टी बीआरएस के साथ रिश्ता पिछले काफी समय से नाजुक दौर से गुजर रहा था। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम थी कि उनके और उनके भाई के.टी. रामा राव (KTR) के बीच गंभीर मतभेद हैं। पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन और उत्तराधिकार की लड़ाई ने कविता को हाशिए पर धकेल दिया था। अपनी नई पार्टी की घोषणा करते हुए कविता ने संकेत दिया कि बीआरएस अब उन उद्देश्यों से भटक गई है जिनके लिए तेलंगाना राज्य का गठन हुआ था। उन्होंने कहा कि भाई के साथ वैचारिक और व्यक्तिगत मतभेदों के कारण उनके लिए पार्टी में गरिमा के साथ बने रहना अब असंभव हो गया था।
सदन में अपने भाषण के दौरान कविता ने उन अफवाहों पर भी कड़ा प्रहार किया, जिनमें कहा जा रहा था कि परिवार में चल रही अनबन संपत्ति और जायदाद के बंटवारे को लेकर है। उन्होंने बेहद भावुक होकर कहा, “कांग्रेस और यहां तक कि मेरे अपने कुछ करीबियों ने आरोप लगाया कि मेरी लड़ाई धन के लिए है। लेकिन मैं एक ईश्वर से डरने वाली महिला हूं।” उन्होंने अपने दोनों बेटों की कसम खाते हुए भावुक स्वर में कहा कि यह मामला पैसों का नहीं, बल्कि उनके आत्मसम्मान का है। कविता ने जोर देकर कहा कि वे अपनी गरिमा को चुप्पी के बदले कभी नहीं बेचेंगी और हमेशा महिलाओं व पिछड़ों के अधिकारों के लिए लड़ती रहेंगी।
अपने पिता और पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए कविता ने उन्हें ‘भगवान समान’ बताया, लेकिन साथ ही पार्टी के वर्तमान नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने एक विवादास्पद बयान दोहराते हुए कहा कि उनके पिता आज ‘शैतानों’ से घिरे हुए हैं, जो उन्हें सही फीडबैक नहीं दे रहे हैं। कविता ने आरोप लगाया कि बीआरएस कई मोर्चों पर जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी है और पार्टी के भीतर ‘अयोग्य व्यक्तियों’ को कमान सौंप दी गई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पार्टी ने अपना रवैया नहीं बदला, तो भगवान भी बीआरएस को पतन से नहीं बचा पाएंगे।
कविता ने खुलासा किया कि तेलंगाना राज्य बनने के बाद से ही उन्हें पार्टी के भीतर कई तरह के प्रतिबंधों और घुटन का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि जब भी उन्होंने पार्टी के आंतरिक मुद्दों और गलत फैसलों पर सवाल उठाए, उनके साथ दुश्मनों जैसा व्यवहार किया गया। कविता के इस कदम से तेलंगाना की राजनीति में अब तीसरे मोर्चे की सुगबुगाहट तेज हो गई है। उनकी नई पार्टी बीआरएस और सत्ताधारी कांग्रेस दोनों के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है। अब देखना यह होगा कि केसीआर की बेटी अपनी इस नई राजनीतिक यात्रा में तेलंगाना की जनता का कितना समर्थन हासिल कर पाती हैं।
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