Kalonji Benefits: भारतीय रसोई में कलौंजी का इस्तेमाल आमतौर पर दाल में तड़का लगाने से लेकर स्वादिष्ट अचार का स्वाद कई गुना बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसकी अनूठी और भीनी-भीनी सुगंध किसी भी साधारण खाने के स्वाद को बेहद लजीज बना देती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि खाने का जायका बढ़ाने वाला यह छोटा सा काला मसाला सेहत के लिहाज से भी किसी वरदान से कम नहीं है?

जाने-माने गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉक्टर शुभम वात्स्य ने हाल ही में अपने यूट्यूब पेज पर एक वीडियो साझा करते हुए बताया है कि कलौंजी के बीजों में ‘थाइमोक्विनोन’ नामक एक बेहद पावरफुल बायोएक्टिव कंपाउंड पाया जाता है, जो अपने 강력 एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी गुणों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यदि कलौंजी का सेवन सही तरीके और सही मात्रा में किया जाए, तो यह हमारे शरीर को अनगिनत स्वास्थ्य लाभ पहुंचा सकती है। आइए इसके फायदों और इस्तेमाल करने के सही तरीकों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

शरीर की अंदरूनी सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को करती है कंट्रोल
हमारे शरीर के अंदर पनपने वाली पुरानी सूजन (इन्फ्लेमेशन) कई प्रकार की गंभीर और जानलेवा बीमारियों की मुख्य वजह बन सकती है। ऐसे में कलौंजी में प्रचुर मात्रा में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण शरीर के भीतर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, सूजन और इंसुलिन रेजिस्टेंस को प्रभावी रूप से कम करने का काम करते हैं। जब शरीर की अंदरूनी सूजन कम होती है, तो इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव हमारी पाचन क्रिया और संपूर्ण मेटाबॉलिक कार्यप्रणाली पर पड़ता है, जिससे शरीर स्वस्थ और ऊर्जावान बना रहता है।
ब्लड शुगर, फैटी लीवर और बैड कोलेस्ट्रॉल को रखती है नियंत्रित
डॉक्टर शुभम वात्स्य के अनुसार, नियमित और सही तरीके से कलौंजी का सेवन करने से फास्टिंग ब्लड शुगर, एचबीएवनसी (HbA1c), खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL), ट्राइग्लिसराइड्स और लिवर एंजाइम्स के स्तर में उल्लेखनीय सुधार देखा जा सकता है। यह मसाला विशेष रूप से टाइप-2 डायबिटीज, फैटी लीवर की समस्या और बढ़े हुए बैड कोलेस्ट्रॉल से पीड़ित लोगों के लिए बेहद गुणकारी साबित होता है। इसलिए, यदि आपका ब्लड शुगर लेवल या खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है, तो अपने खान-पान में इस जादुई मसाले को शामिल करना आपके स्वास्थ्य के लिए एक बेहद समझदारी भरा कदम हो सकता है।
मेटाबॉलिज्म को तेज कर वजन घटाने में बेहद मददगार
आज के समय में खराब जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतों के कारण बढ़ता हुआ वजन या मोटापा एक आम समस्या बन चुका है। यदि आपका वजन भी तेजी से बढ़ रहा है और आप इसे नियंत्रित करना चाहते हैं, तो कलौंजी आपके लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक विकल्प हो सकती है। इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व शरीर के मेटाबॉलिज्म को तेजी से बूस्ट करते हैं। जब आपका मेटाबॉलिज्म फास्ट होता है, तो शरीर की कैलोरी बर्न करने की क्षमता बढ़ती है, जो बढ़े हुए वजन को प्राकृतिक रूप से कम करने में हमारी बहुत मदद करती है।
पेट की गैस, अपच और गट हेल्थ के लिए है रामबाण औषधि
डॉक्टर शुभम वात्स्य का यह भी कहना है कि कलौंजी हमारी आंतों की सेहत यानी गट हेल्थ को सुधारने के लिए भी जानी जाती है। इसमें मौजूद थाइमोक्विनोन और कार्मिनेटिव गुण पेट में गैस बनने, ब्लोटिंग (पेट फूलना), अपच और खट्टी डकारों जैसी पेट से जुड़ी तमाम परेशानियों में बेहद असरदार और कारगर साबित होते हैं। कमजोर पाचन तंत्र वाले लोगों के लिए इसका नियमित सेवन पेट को हमेशा हल्का और स्वस्थ रखता है।
कलौंजी का सही तरीके से सेवन करने और उपयोग करने की विधि
अपने दैनिक जीवन में कलौंजी का अधिकतम लाभ उठाने के लिए इसे खाने का एक खास तरीका अपनाना चाहिए। कलौंजी का इस्तेमाल करने से पहले इसे हल्की आंच पर सूखा भून (रोस्ट) लेना चाहिए। बीजों को भूनने से इसके अंदर मौजूद प्राकृतिक तेल और औषधीय गुण एक्टिव हो जाते हैं, जिससे इसकी खुशबू और इसके फायदे दोनों ही कई गुना बढ़ जाते हैं। हालांकि, इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा में ही करना चाहिए। आप रोजाना आधा चम्मच भुनी हुई कलौंजी को अपने ताजे सलाद, दाल या किसी भी सब्जी में ऊपर से डालकर आसानी से इसका सेवन कर सकते हैं।
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