Kandhamal Encounter
Kandhamal Encounter: ओडिशा के कंधमाल जिले में गुरुवार को सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच आमने-सामने की जंग हुई। पुलिस को खुफिया जानकारी मिली थी कि चकापाड़ थाना क्षेत्र के घने जंगलों में माओवादियों का एक बड़ा समूह छिपा हुआ है। इस सूचना पर कार्रवाई करते हुए स्पेशल इंटेलिजेंस विंग (SIW) और सुरक्षाबलों ने एक संयुक्त ऑपरेशन शुरू किया। जब सुरक्षाबल इलाके की घेराबंदी कर रहे थे, तभी नक्सलियों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में सुरक्षाबलों ने भी मोर्चा संभाला और भीषण मुठभेड़ में चार नक्सलियों को मार गिराया।
मुठभेड़ के बाद जब तलाशी अभियान चलाया गया, तो मारे गए नक्सलियों में सबसे प्रमुख नाम गणेश उइके का निकला। 69 वर्षीय गणेश उइके सीपीआई (माओवादी) की शक्तिशाली ‘केंद्रीय समिति’ का सदस्य था। वह तेलंगाना के नालगोंडा जिले का मूल निवासी था और पिछले कई दशकों से नक्सली गतिविधियों में संलिप्त था। संगठन के भीतर वह पक्का हनुमंतु, राजेश तिवारी, चमरू और रूपा जैसे कई छद्म नामों से जाना जाता था। उसकी सक्रियता और पद को देखते हुए सरकार ने उस पर 1.1 करोड़ रुपये का इनाम रखा था।
इस ऑपरेशन में केवल गणेश उइके ही नहीं, बल्कि तीन और माओवादी भी मारे गए हैं। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, इन तीन में से दो महिला माओवादी शामिल हैं। हालांकि, अभी तक इन तीनों की आधिकारिक पहचान पुख्ता नहीं हो पाई है। सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और माओवादी साहित्य भी बरामद किया है। पुलिस का मानना है कि इस दस्ते के मारे जाने से संगठन के नेटवर्क को अपूरणीय क्षति हुई है।
गणेश उइके न केवल ओडिशा बल्कि छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र समेत लगभग सात राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ था। वह माओवादियों के ‘साउथ सब जोनल’ का इंचार्ज था और उसे पूरे ओडिशा राज्य में संगठन को खड़ा करने और चलाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। उसकी रणनीतिक समझ और जंगलों के ज्ञान के कारण वह लंबे समय से गिरफ्तारी से बचता आ रहा था। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में होने वाले कई बड़े हमलों के पीछे उसी का हाथ माना जाता था।
यह ऑपरेशन पूरी तरह से सटीक खुफिया जानकारी (Intelligence) पर आधारित था। सुरक्षाबलों का कहना है कि गणेश उइके का अंत ओडिशा में माओवादी आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका है। वर्तमान में इलाके में ‘कॉम्बिंग ऑपरेशन’ जारी है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई और नक्सली वहां छिपा न हो। राज्य सरकार और पुलिस विभाग ने इस सफल ऑपरेशन के लिए जवानों के साहस की सराहना की है और इसे नक्सल मुक्त ओडिशा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
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