Kandhamal Wildlife
Kandhamal Wildlife: ओडिशा के जंगलों से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने वन्यजीव संरक्षण और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कंधमाल जिले के बेलघर जंगल में एक हाथी की नृशंस हत्या कर दी गई और साक्ष्य मिटाने के लिए उसके शरीर को टुकड़ों में काटकर अलग-अलग स्थानों पर दफना दिया गया। इस सनसनीखेज मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि जिन कंधों पर जंगल की सुरक्षा की जिम्मेदारी थी, वही इस क्रूरता में शामिल पाए गए हैं।
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, हाथी का शव 5 जनवरी को बालीगुड़ा वन प्रभाग के बेलघर रेंज में एक झरने के पास से बरामद किया गया था। शुरुआत में यह एक सामान्य मौत का मामला लग रहा था, लेकिन जब जांच आगे बढ़ी तो सच्चाई देखकर अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई। हाथी का शरीर पूर्ण अवस्था में नहीं था, बल्कि उसे धारदार हथियारों से टुकड़ों में विभाजित किया गया था। इन टुकड़ों को झरने के आसपास के क्षेत्र में अलग-अलग गड्ढों में छिपाया गया था ताकि किसी को कानों-कान खबर न हो सके।
इस पूरे मामले की सबसे काली परत तब खुली जब जांच के घेरे में खुद वन विभाग के कर्मचारी आ गए। सूत्रों और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इस जघन्य अपराध में बेलघर रेंज के वन रेंजर और होमगार्ड के शामिल होने के पुख्ता सबूत मिले हैं। यह माना जा रहा है कि हाथी की मौत के बाद अपनी लापरवाही छिपाने या किसी अन्य गुप्त उद्देश्य के लिए इन अधिकारियों ने न केवल शव को ठिकाने लगाया, बल्कि मामले को पूरी तरह दबाने की पुरजोर कोशिश भी की। रक्षकों द्वारा ही साक्ष्यों के साथ की गई इस छेड़छाड़ ने वन्यजीव प्रेमियों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है।
आमतौर पर हाथियों की मौत के पीछे हाथी दांत के तस्करों या शिकारियों का हाथ होता है। हालांकि, इस मामले में बालीगुड़ा के डीएफओ (DFO) घनश्याम मोहंत ने शुरुआत में शिकारियों की थ्योरी को प्राथमिकता नहीं दी थी। अधिकारियों का मानना था कि यदि शिकारी शामिल होते, तो वे केवल दांत लेकर भाग जाते, लेकिन शरीर के टुकड़े कर उन्हें दफनाने की प्रक्रिया में वन विभाग के स्थानीय तंत्र की संलिप्तता अधिक स्पष्ट नजर आ रही थी। हालांकि, विभाग अब हर कोण से जांच कर रहा है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हत्या का असली मकसद क्या था।
बालीगुड़ा डीएफओ घनश्याम मोहंत ने मामले की पुष्टि करते हुए कहा कि बेलघर वन विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने इस पूरी घटना पर पर्दा डालने का प्रयास किया था। लेकिन सच सामने आने के बाद विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। घटना में संलिप्तता और लापरवाही के आरोप में कई अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। डीएफओ ने जनता को भरोसा दिलाया है कि यह केवल शुरुआत है; हाथी की मौत के असल कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत फॉरेंसिक जांच जारी है और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसे कानून के तहत कठोरतम सजा दी जाएगी।
ओडिशा के जंगलों में हाथियों की सुरक्षा हमेशा से एक चिंता का विषय रही है, लेकिन सरकारी अधिकारियों द्वारा साक्ष्य मिटाने के लिए हाथी के शरीर के टुकड़े करने जैसी घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह मामला दर्शाता है कि कैसे भ्रष्टाचार वन्यजीवों के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। पर्यावरणविदों ने मांग की है कि इस मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि पर्दे के पीछे छिपे असली गुनहगारों का चेहरा सामने आ सके।
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