Kangana Ranaut
Kangana Ranaut: हिमाचल प्रदेश की मंडी सीट से भाजपा सांसद और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने एक बार फिर अपने बेबाक बयानों से देश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है। इस बार उनके निशाने पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी रहे। कंगना ने राहुल गांधी के संसदीय आचरण और व्यवहार पर गंभीर सवाल उठाते हुए दावा किया कि संसद के भीतर उनका तरीका मर्यादित नहीं है। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि राहुल गांधी के व्यवहार के कारण महिला सांसदों को सदन में असहजता महसूस होती है। कंगना के इस बयान ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग को एक नया मोड़ दे दिया है।
कंगना रनौत ने राहुल गांधी के व्यक्तित्व और उनके संसद में रहने के तरीके की कड़ी आलोचना की। जब उनसे ब्यूरोक्रेट्स द्वारा राहुल गांधी के रवैये पर लिखे गए पत्र के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सहमति जताते हुए कहा कि सदन में उनका आचरण वास्तव में चिंताजनक है। कंगना ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का व्यवहार “टपोरी” जैसा है और वे अक्सर दूसरों के साथ “तू-तड़ाक” करके बात करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि जब कोई अन्य सदस्य इंटरव्यू दे रहा होता है या अपनी बात रख रहा होता है, तो राहुल गांधी ‘हूटिंग कॉल्स’ (हूटिंग करना) करते हैं, जो एक जिम्मेदार नेता को शोभा नहीं देता।
दिलचस्प बात यह रही कि जहाँ कंगना ने राहुल गांधी की जमकर आलोचना की, वहीं उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के व्यवहार की सराहना भी की। कंगना ने कहा कि राहुल गांधी को शिष्टाचार और शालीनता अपनी बहन प्रियंका से सीखनी चाहिए। उन्होंने कहा, “प्रियंका गांधी का व्यवहार बहुत अच्छा और संतुलित है, लेकिन राहुल गांधी स्वयं शर्म के पात्र हैं।” कंगना के मुताबिक, सार्वजनिक जीवन में जिस गरिमा की अपेक्षा एक नेता से की जाती है, राहुल गांधी उसमें पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं।
राजनीतिक हमलों के बीच कंगना ने धर्म और आस्था के मुद्दे पर भी अपनी राय रखी। सनातन धर्म के अस्तित्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग मूल रूप से सनातनी ही हैं। कंगना ने तर्क दिया कि सनातन का अर्थ है—जिसका न कोई आदि है और न ही कोई अंत। उनके अनुसार, दुनिया के अन्य सभी धर्म महज 1000 या 1500 साल पुराने हैं, जबकि सनातन शाश्वत सत्य है। उन्होंने राहुल गांधी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि अगर वे भी इसी मिट्टी से हैं, तो उन्हें खुद को सनातनी लिखने या सत्य को स्वीकार करने में घबराहट क्यों होती है?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ पूर्व अधिकारियों और ब्यूरोक्रेट्स ने राहुल गांधी के संसदीय व्यवहार को लेकर चिंता व्यक्त की थी। कंगना ने इसी का समर्थन करते हुए इसे महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जोड़ दिया। उन्होंने तर्क दिया कि संसद जैसे लोकतंत्र के मंदिर में यदि नेता प्रतिपक्ष का व्यवहार सड़क छाप या ‘टपोरी’ जैसा होगा, तो यह पूरे देश के लिए गलत संदेश है। भाजपा सांसद के इस बयान के बाद कांग्रेस ने भी पलटवार किया है, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के आसार हैं।
कंगना रनौत का यह हमला महज एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह संसद के भीतर गिरते संवाद के स्तर की ओर भी इशारा करता है। जहाँ भाजपा इसे राहुल गांधी की अपरिपक्वता बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे कंगना की सुर्खियों में रहने की कोशिश करार दे रही है। हालांकि, प्रियंका गांधी की तारीफ करके कंगना ने यह संकेत देने की कोशिश की है कि उनकी लड़ाई व्यक्तिगत नहीं, बल्कि व्यवहार और कार्यशैली को लेकर है। अब देखना यह है कि राहुल गांधी या कांग्रेस आलाकमान इन तीखे व्यक्तिगत हमलों का क्या जवाब देता है।
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