Naxal Surrender
Naxal Surrender : छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित कांकेर जिले से मानवता और कर्तव्यबोध की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सोशल मीडिया पर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। नक्सल विरोधी अभियान के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों ने एक मिसाल पेश की है। वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे खूंखार नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने से पहले पुलिस जवानों ने उन्हें प्रेमपूर्वक भोजन कराया। यह घटना दर्शाती है कि बंदूक की लड़ाई के बीच भी संवेदनाएं जीवित हैं और प्यार के जरिए बड़े से बड़े संघर्ष को विराम दिया जा सकता है।
जानकारी के अनुसार, कांकेर के परतापुर एरिया कमेटी के तीन सक्रिय सदस्य लंबे समय से जंगलों में भटक रहे थे। शनिवार को जब इन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण करने का मन बनाया, तब वे बेहद थके हुए और भूखे-प्यासे थे। जंगल में अभियान पर निकले पुलिस जवानों ने जैसे ही उनकी स्थिति देखी, उन्होंने बिना देर किए अपना राशन उनके साथ साझा किया। आत्मसमर्पण की औपचारिक प्रक्रिया से पहले इन नक्सलियों ने जवानों के साथ जमीन पर बैठकर खाना खाया। पुलिस का यह व्यवहार उन भटके हुए युवाओं के लिए एक बड़ा संदेश था कि सरकार और प्रशासन उन्हें दुश्मन नहीं, बल्कि समाज का हिस्सा मानते हैं।
भोजन करने के बाद इन तीनों नक्सलियों ने आधिकारिक तौर पर हिंसा का रास्ता छोड़ने का ऐलान किया। आत्मसमर्पण करने वालों की पहचान राधिका कुंजाम, संदीप कड़ियाम और रैनु पद्मा के रूप में हुई है। ये तीनों लंबे समय से परतापुर एरिया कमेटी में सक्रिय थे और कई वारदातों में शामिल रहे थे। उन्होंने परतापुर थाने पहुंचकर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने दो एसएलआर (SLR) राइफल और एक भरमार हथियार सरेंडर किए। हथियारों का यह जखीरा सौंपना नक्सलियों के गिरते मनोबल और सुरक्षा बलों की बढ़ती पैठ का प्रतीक है।
इन तीन महत्वपूर्ण सदस्यों के आत्मसमर्पण के बाद कांकेर जिले में नक्सलवाद अपने खात्मे की ओर है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अब पूरे जिले में मात्र 16 सक्रिय नक्सली शेष रह गए हैं। कांकेर पुलिस ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए बचे हुए नक्सलियों से एक बार फिर भावुक अपील की है। पुलिस महानिरीक्षक और स्थानीय अधिकारियों ने कहा है कि जो लोग अब भी जंगलों में छिपे हैं, वे अपने इन साथियों से प्रेरणा लें और हथियार डालकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ें। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत उन्हें बेहतर जीवन और रोजगार के अवसर दिए जाएंगे।
आत्मसमर्पण करने के ठीक एक दिन बाद, राधिका, संदीप और रैनु ने अपने उन साथियों के नाम एक संदेश जारी किया है जो अभी भी संगठन में हैं। उन्होंने अपने लीडर चंदर और रूपी से विशेष रूप से वापसी की अपील की। इन नक्सलियों ने अपनी स्थानीय गोंडी भाषा में एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने जंगलों की कठिन परिस्थितियों और हिंसा के खोखलेपन का जिक्र किया। पत्र में साफ तौर पर लिखा गया है कि हथियार उठाकर मौत के साये में जीने से कहीं बेहतर है कि अपने परिवार के साथ शांतिपूर्ण जीवन बिताया जाए।
कांकेर में नक्सलियों के लगातार हो रहे मोहभंग से यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में विकास की किरणें पहुंच रही हैं। परतापुर में हुए इस सरेंडर ने न केवल सुरक्षा बलों का हौसला बढ़ाया है, बल्कि आम जनता में भी सुरक्षा की भावना पैदा की है। जवानों द्वारा नक्सलियों को भोजन कराने वाले इस वीडियो ने यह भी साबित कर दिया है कि बस्तर और कांकेर के जंगलों में चल रही यह जंग केवल गोलियों से नहीं, बल्कि विश्वास जीतकर भी जीती जा सकती है।
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