Regime Change : केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिशों वाले बयान पर राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कांग्रेस पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सत्ता परिवर्तन की इच्छा जनता की है। सिब्बल ने भ्रष्टाचार, संवैधानिक संस्थाओं और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
सोशल मीडिया पोस्ट में सरकार पर लगाए आरोप
कपिल सिब्बल ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि कांग्रेस बांग्लादेश के रास्ते सत्ता परिवर्तन नहीं चाहती, बल्कि जनता खुद बदलाव चाहती है। उन्होंने अपने बयान में भ्रष्टाचार के खिलाफ हुए आंदोलनों का जिक्र किया और सवाल उठाया कि सत्ता में आने के बाद सरकार ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर क्या किया। सिब्बल ने आरोप लगाया कि सरकार ने भ्रष्टाचार को गले लगाया, संस्थाओं पर कब्जा किया और मतदाता सूची में हेरफेर किया। ये आरोप उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं।
भ्रष्टाचार और संस्थाओं को लेकर सरकार पर निशाना
सिब्बल ने अपने बयान में भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाए गए नारों और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बीच अंतर बताया। उनका कहना था कि जनता ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाली राजनीति को समर्थन दिया था, लेकिन अब सरकार को जवाबदेही के सवालों का सामना करना चाहिए। उन्होंने संवैधानिक संस्थाओं और मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, मतदाता सूची में हेरफेर और संस्थाओं पर कब्जे से जुड़े उनके आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों और आधिकारिक प्रतिक्रियाओं को देखना जरूरी है।
राजनाथ सिंह ने लखनऊ में क्या कहा था?
दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 16 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस और विपक्षी दलों पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष बांग्लादेश की घटनाओं से प्रेरित होकर भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिश कर रहा है। सिंह के मुताबिक, विपक्षी दल विरोध प्रदर्शनों के जरिए युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल राजनीतिक अस्थिरता और अराजकता फैलाने के लिए कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, लेकिन इसके नाम पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।
युवाओं के आंदोलन को लेकर भी उठाए थे सवाल
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में युवाओं को लेकर भी विपक्ष पर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि युवाओं की ऊर्जा का उपयोग राष्ट्र निर्माण के बजाय राजनीतिक टकराव और अव्यवस्था के लिए किया जा रहा है। उन्होंने विपक्ष के आंदोलन को चुनाव सुधार और मतदाता सूची के मुद्दों तक सीमित मानने से इनकार किया। उनके अनुसार, इस आंदोलन के पीछे सत्ता हासिल करने की कोशिश हो सकती है। विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों और सरकार के आरोपों के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
सत्ता परिवर्तन और SIR बना राजनीतिक बहस का केंद्र
राजनाथ सिंह के बयान पर कपिल सिब्बल की प्रतिक्रिया के बाद सत्ता परिवर्तन, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची की पारदर्शिता जैसे मुद्दे फिर चर्चा में आ गए हैं। विपक्ष चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं की जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार विपक्ष के आंदोलन की मंशा पर सवाल कर रही है। आने वाले दिनों में इस राजनीतिक टकराव के और तेज होने की संभावना है। फिलहाल दोनों पक्षों के बयान देश में लोकतंत्र, चुनाव सुधार और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर जारी बहस को सामने लाते हैं।
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