Karnataka Farmers
Karnataka Farmers: कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने राज्य के गन्ना किसानों को आर्थिक मजबूती देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। वर्ष 2025-26 के पेराई सीजन के लिए राज्य सरकार ने 300 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जारी करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत, जिन किसानों ने राज्य की विभिन्न चीनी मिलों को गन्ना सप्लाई किया है, उन्हें प्रति टन 50 रुपये की दर से सीधे उनके बैंक खातों में भुगतान किया जाएगा। गन्ना विकास और चीनी मंत्री शिवानंद पाटिल ने बुधवार को इस वित्तीय सहायता की पुष्टि करते हुए बताया कि यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें खेती की लागत में राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
यह वित्तीय सहायता केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) के अतिरिक्त दी जा रही है। मंत्री पाटिल के अनुसार, राज्य सरकार ने पहले ही घोषणा की थी कि किसानों को एफआरपी के अलावा 100 रुपये प्रति टन की अतिरिक्त राशि दी जाएगी। इस 100 रुपये के अतिरिक्त बोझ को सरकार और चीनी मिलों के बीच बराबर-बराबर बांटा गया है। यानी, 50 रुपये प्रति टन का भुगतान राज्य सरकार अपने खजाने से करेगी, जबकि शेष 50 रुपये संबंधित चीनी मिलों द्वारा वहन किए जाएंगे। इस निर्णय से गन्ना उत्पादकों को बाजार की अनिश्चितताओं के बीच एक सुरक्षा कवच प्राप्त होगा।
इस सहायता राशि की पृष्ठभूमि पिछले वर्ष की एक महत्वपूर्ण बैठक से जुड़ी है। मंत्री शिवानंद पाटिल ने याद दिलाया कि 8 नवंबर को मुख्यमंत्री ने विधान सौध में चीनी मिल मालिकों और किसान प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई थी। इसी बैठक में यह सहमति बनी थी कि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के लिए सरकारी और निजी क्षेत्र मिलकर योगदान देंगे। सरकार ने अब अपने वादे को निभाते हुए 300 करोड़ रुपये का अपना हिस्सा जारी कर दिया है। यह फंड गन्ना विकास कमिश्नर के माध्यम से जिला स्तर पर डिप्टी कमिश्नरों को हस्तांतरित किया जाएगा, जो सीधे वितरण प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
प्रशासनिक स्तर पर यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं कि भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त हो। डिप्टी कमिश्नरों को आदेश दिया गया है कि वे मिलों द्वारा प्रदान किए गए डेटा के आधार पर किसानों के बैंक खातों (DBT) में 50 रुपये प्रति टन की राशि जमा करें। इसके साथ ही, जिला प्रशासन को यह भी पक्का करना होगा कि चीनी मिल प्रबंधन अपने हिस्से के 50 रुपये प्रति टन का भुगतान भी योग्य किसानों को समय पर कर दे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि किसानों को बिना किसी देरी के कुल 100 रुपये प्रति टन का लाभ मिल सके।
मौजूदा पेराई सीजन (2025-26) की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए मंत्री ने बताया कि अब तक राज्य की 81 चीनी मिलों ने पेराई का कार्य शुरू कर दिया है। इनमें से 29 मिलें अपना काम पूरा भी कर चुकी हैं। आंकड़ों के अनुसार, अब तक 521 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की जा चुकी है, और सीजन समाप्त होने तक यह आंकड़ा 600 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचने की उम्मीद है। उम्मीद जताई जा रही है कि मार्च के पहले सप्ताह तक पेराई का काम पूरी तरह संपन्न हो जाएगा। सरकार ने अपनी 300 करोड़ की वित्तीय योजना इसी 600 लाख मीट्रिक टन के अनुमानित लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार की है।
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