Karnataka Politics
Karnataka Politics: कर्नाटक की राजनीति एक बार फिर तेज़ हलचल के दौर से गुजर रही है। उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के करीबी मंत्री और विधायक अचानक दिल्ली पहुंचने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएँ तेज हो गई हैं। बताया जा रहा है कि शिवकुमार खेमे के वरिष्ठ नेता—मंत्री एन. चलुवरायसामी और विधायक इक़बाल हुसैन, एच.सी. बालकृष्ण, एस.आर. श्रीनिवास और टी.डी. राजेगौड़ा—राजधानी में मौजूद हैं। इन नेताओं का उद्देश्य कांग्रेस हाईकमान से मुलाकात कर मौजूदा सत्ता संतुलन और भविष्य की रणनीति पर चर्चा करना है।
दिल्ली पहुंचे इन विधायकों और नेताओं की हलचल से यह साफ है कि डीके शिवकुमार गुट पार्टी नेतृत्व से अपने ‘समझौते’ की याद दिलाना चाहता है। माना जाता है कि जब कांग्रेस ने सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री और शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया था, तब अंदरूनी सहमति बनी थी कि ढाई साल बाद नेतृत्व परिवर्तन पर विचार किया जाएगा। इस पृष्ठभूमि में दिल्ली दौरा राजनीतिक दबाव बढ़ाने के रूप में देखा जा रहा है।
डीके शिवकुमार समर्थक विधायक टीडी राजेगौड़ा ने दिल्ली में कांग्रेस संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल से मुलाकात की। मुलाकात के बाद यह संकेत साफ मिला कि शिवकुमार खेमे की मांगें गंभीर हैं और वे संगठन स्तर पर तुरंत बातचीत चाहते हैं। राजेगौड़ा का कहना है कि अब समय आ गया है कि पार्टी तय वादों को निभाए और सत्ता संतुलन को नई संरचना दे।
दिल्ली पहुंचे सभी वरिष्ठ नेता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात मिलने वाले हैं। माना जा रहा है कि यह मुलाकात सीएम पद को लेकर ढाई साल के समझौते की पुन: समीक्षा पर केंद्रित रहेगी। शिवकुमार समर्थक चाहते हैं कि अगले चरण में सत्ता परिवर्तन का औपचारिक निर्णय लिया जाए और उन्हें मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी जाए।
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के भाई और पूर्व सांसद डीके सुरेश ने भी इस विवाद को हवा देते हुए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ढाई साल के वादे को निभाएंगे। सुरेश का यह बयान राजनीतिक संकेतों से भरा हुआ माना जा रहा है, जिससे पार्टी नेतृत्व पर अप्रत्यक्ष दबाव बढ़ता दिख रहा है।
उधर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने ऐसी सभी अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पूरी मजबूती से काम कर रही है और वह जनता से किए गए वादों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह अंधविश्वासों पर भरोसा नहीं करते और किसी भी इलाके में जाने से सत्ता पर कोई असर नहीं पड़ता। यह बयान उनके चामराजनगर दौरे को लेकर फैली अफवाहों के जवाब में आया है।
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह पूरा पांच साल मुख्यमंत्री बने रहेंगे, तो सिद्धारमैया ने इसे ‘अनावश्यक बहस’ बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कैबिनेट फेरबदल पर पहले ही बात हुई थी और उसी संदर्भ में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा सामने आई है। उन्होंने कहा कि 34 में से 2 मंत्री पद अभी खाली हैं जिन्हें अगले कैबिनेट फेरबदल में भरा जाएगा। उनका यह बयान संकेत देता है कि वह फिलहाल पद छोड़ने के मूड में नहीं हैं।
कुल मिलाकर, दिल्ली की हलचल से कर्नाटक की राजनीति में एक नई करवट दिखाई दे रही है। जहां डीके शिवकुमार गुट अपने राजनीतिक वादे को पूरा करवाने के लिए सक्रिय है, वहीं सिद्धारमैया अपनी स्थिति मजबूत बताते हुए सत्ता परिवर्तन की अटकलों को बेबुनियाद बता रहे हैं। आने वाले दिनों में हाईकमान का फैसला राज्य की राजनीति की दिशा तय करेगा।
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