Karnataka Politics
Karnataka Politics: कर्नाटक की सियासत एक बार फिर गर्माती दिखाई दे रही है। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से मुलाकात की। मुलाकात के बाद सिद्धारमैया ने स्पष्ट किया कि बैठक में organizational मुद्दों पर चर्चा हुई, न कि कैबिनेट में बड़े बदलाव या नेतृत्व परिवर्तन पर। उनके अनुसार मीडिया में चल रही बातें केवल अटकलें हैं और हकीकत से दूर हैं।
सिद्धारमैया ने बताया कि खड़गे से बातचीत मुख्य रूप से पार्टी संगठन को मजबूत करने और आगामी स्थानीय निकाय एवं तालुका-जिला पंचायत चुनावों की तैयारियों पर केंद्रित थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और पार्टी नेतृत्व स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ को और मजबूत करना चाहता है। इस संदर्भ में रणनीति और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत बातचीत की गई।
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें लंबे समय से चर्चा का विषय रही हैं। इस बीच सिद्धारमैया ने साफ कहा कि नेतृत्व परिवर्तन जैसे बड़े फैसले केवल पार्टी हाईकमान ही करता है, न कि राज्य नेतृत्व। उन्होंने दोहराया कि यह मुद्दा मीडिया द्वारा उछाला गया है और वास्तविकता में इस पर किसी प्रकार की चर्चा नहीं हुई है। उनके अनुसार आलाकमान जो भी निर्णय लेगा, वह सभी के लिए अंतिम और स्वीकार्य होगा—चाहे वह स्वयं हों या उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार।
हाल में दिए अपने एक बयान में सिद्धारमैया ने कहा था कि वे न केवल अगले दो राज्य बजट पेश करेंगे बल्कि पूरा पांच साल का कार्यकाल भी पूरा करेंगे। इस बयान ने राजनीतिक हलचल को और बढ़ा दिया था। जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या वे लगातार बजट प्रस्तुत करते रहेंगे, तो उन्होंने जवाब दिया कि उनका इरादा पूर्ण कार्यकाल निभाने का है और आगामी बजट वे ही पेश करेंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि सरकार स्थिर है और किसी प्रकार के नेतृत्व संकट की स्थिति नहीं है।
सिद्धारमैया के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि वे उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और सरकार में एकजुट होकर काम करेंगे। शिवकुमार ने जोर दिया कि वे किसी भी प्रकार की गुटबाजी में विश्वास नहीं रखते। उन्होंने कहा कि वे पूरे 140 कांग्रेस विधायकों के अध्यक्ष हैं और सबको अपनी बात रखने का अधिकार है। अगर कुछ विधायक दिल्ली जाकर हाईकमान से मिलते हैं, तो यह उनका अधिकार है और इसे गलत नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।
दोनों शीर्ष नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाजी के बीच, एआईसीसी के कर्नाटक प्रभारी महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने सभी विधायकों और नेताओं को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि नेतृत्व परिवर्तन जैसे संवेदनशील मुद्दों पर सार्वजनिक बयान देना अनुशासनहीनता माना जाएगा। पार्टी ऐसे मामलों पर मतभेदों को सार्वजनिक करने के बजाय आंतरिक स्तर पर बातचीत को प्राथमिकता देती है। सुरजेवाला ने दोहराया कि कांग्रेस नेतृत्व किसी भी निर्णय पर अंतिम शब्द रखता है और सभी नेताओं को उसका सम्मान करना चाहिए।
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