Karur Stampede Case
Karur Stampede Case: तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और ‘तमिलगा वेट्री कजगम’ (TVK) के अध्यक्ष थलपति विजय की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सोमवार (12 जनवरी 2026) को करूर भगदड़ मामले की जांच के सिलसिले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विजय से लगभग 6 घंटे तक गहन पूछताछ की। विजय सुबह 11:29 बजे अपनी काली रेंज रोवर कार में सवार होकर दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय पहुंचे थे। पूछताछ का यह दौर शाम करीब 6:15 बजे तक चला। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच हुई इस पेशी ने तमिलनाडु की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान विजय ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि उनकी पार्टी भगदड़ की घटना के लिए जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि रैली स्थल पर हालात और अधिक न बिगड़ें, इसलिए वे उस दिन वहां से रवाना हो गए थे। हालांकि, सीबीआई के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी जारी है और विजय को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। जांच एजेंसी अब इस मामले में गहनता से साक्ष्य जुटा रही है ताकि जल्द ही चार्जशीट दाखिल की जा सके।
यह पूरा विवाद 27 सितंबर 2025 को करूर जिले में आयोजित टीवीके (TVK) की एक चुनावी रैली से जुड़ा है। इस कार्यक्रम में थलपति विजय को देखने के लिए उम्मीद से कहीं अधिक भीड़ उमड़ पड़ी थी। कुप्रबंधन और भारी भीड़ के दबाव के कारण अचानक भगदड़ मच गई, जिसमें 41 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी और 60 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस भयावह हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, जिसके बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी।
6 जनवरी को सीबीआई ने विजय को समन जारी कर 12 जनवरी को पेश होने का निर्देश दिया था। इससे पहले एजेंसी इस मामले में टीवीके के कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों और रैली के आयोजकों से भी पूछताछ कर चुकी है। सीबीआई यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या रैली के लिए आवश्यक सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था और क्या आयोजकों ने क्षमता से अधिक भीड़ को आमंत्रित किया था। एजेंसी का मुख्य फोकस अब विजय की भूमिका और पार्टी की जिम्मेदारी तय करने पर है।
करूर भगदड़ मामले की जांच को लेकर तमिलनाडु सरकार और विजय की पार्टी के बीच कानूनी जंग भी जारी है। दिसंबर में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर सीबीआई जांच के आदेश को रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, टीवीके ने इसका कड़ा विरोध किया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार की याचिका तथ्यों से परे है और भ्रामक है। पार्टी का मानना है कि सीबीआई जांच रुकवाने की कोशिशें केवल जांच और सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त निगरानी समिति के काम में बाधा डालने का प्रयास हैं।
थलपति विजय ने हाल ही में राजनीति में कदम रखा है और उनकी पार्टी आगामी चुनावों के लिए जोर-शोर से तैयारियां कर रही है। ऐसे में सीबीआई की पूछताछ और भगदड़ के आरोपों ने उनकी छवि के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। यदि इस मामले में चार्जशीट में उनका नाम आता है, तो उनके राजनीतिक भविष्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। फिलहाल, पूरा तमिलनाडु सीबीआई की अगली कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहा है।
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