करवा चौथ पर महिलाएं चांद को छलनी से देखकर पति का चेहरा निहारती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस परंपरा को भगवान गणेश और चंद्रमा के श्राप की कथा से भी जोड़ा जाता है? आखिर चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन को लेकर ऐसी मान्यता क्यों प्रचलित है?
करवा चौथ पर महिलाएं चांद को छलनी से देखकर पति का चेहरा निहारती हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस परंपरा को भगवान गणेश और चंद्रमा के श्राप की कथा से भी जोड़ा जाता है? आखिर चतुर्थी तिथि पर चंद्र दर्शन को लेकर ऐसी मान्यता क्यों प्रचलित है?

Karwa Chauth 2026 : करवा चौथ का व्रत हिंदू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला उपवास रखती हैं। पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को महिलाएं विधि-विधान से पूजा करती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन करके अपना व्रत खोलती हैं। इस दौरान एक परंपरा सबसे ज्यादा ध्यान खींचती है। महिलाएं चांद को सीधे देखने के बजाय छलनी से उसके दर्शन करती हैं और फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा निहारती हैं। आखिर इस रस्म के पीछे क्या मान्यता है? धार्मिक कथाओं में इसका संबंध भगवान गणेश और चंद्रमा के बीच हुई एक घटना से जोड़ा जाता है। द्रिक पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को रखा जाएगा।

करवा चौथ की पूजा में छलनी का विशेष स्थान माना जाता है। महिलाएं चंद्रमा निकलने के बाद पूजा की थाली लेकर उसकी आराधना करती हैं और अर्घ्य अर्पित करती हैं। इसके बाद छलनी की ओट से चंद्रमा को देखती हैं और फिर उसी छलनी से पति का चेहरा निहारती हैं। इस रस्म को पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास, समर्पण और वैवाहिक रिश्ते की मजबूती का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद पति अपनी पत्नी को पानी पिलाकर व्रत खुलवाते हैं। हालांकि, इस परंपरा के पीछे की धार्मिक व्याख्या अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है।

पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार भगवान गणेश कहीं जा रहे थे। उनके स्वरूप को देखकर चंद्रमा हंसने लगे और उन्होंने गणेश जी का उपहास किया। कथा में बताया जाता है कि चंद्रमा को अपनी सुंदरता पर अभिमान था। उनका व्यवहार भगवान गणेश को पसंद नहीं आया और उन्होंने क्रोधित होकर चंद्रमा को श्राप दे दिया।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश ने कहा कि जो व्यक्ति चतुर्थी तिथि पर चंद्रमा के दर्शन करेगा, उस पर झूठा आरोप लग सकता है। इस कथा को चंद्र दर्शन से जुड़ी सावधानियों का एक प्रमुख आधार माना जाता है। बाद में चंद्रमा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान गणेश से क्षमा मांगी। मान्यता है कि गणेश जी ने उन्हें क्षमा कर दिया, लेकिन चतुर्थी पर चंद्र दर्शन से जुड़ी परंपरा प्रचलित रही।
गणेश जी और चंद्रमा से जुड़ी कथा में भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का विशेष उल्लेख मिलता है। इसी तिथि पर गणेश चतुर्थी मनाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चंद्रमा के दर्शन करने से बचने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे झूठा कलंक लगने की आशंका से जुड़ी कथा प्रचलित है।

करवा चौथ भी कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इसी वजह से कुछ लोक मान्यताओं में इस दिन चंद्रमा को छलनी से देखने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है।
करवा चौथ की शाम को महिलाएं पूजा के बाद चंद्रमा के निकलने की प्रतीक्षा करती हैं। चांद दिखाई देने पर वे अर्घ्य देती हैं, छलनी से चंद्र दर्शन करती हैं और फिर पति का चेहरा देखती हैं। इसके बाद पति के हाथों जल ग्रहण करके व्रत खोला जाता है। इस परंपरा का मुख्य भाव पति की खुशहाली, वैवाहिक जीवन में प्रेम और परिवार की समृद्धि की कामना करना है।

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