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Epstein Scandal 2026: एपस्टीन विवाद में फंसी ब्रिटिश सरकार, कीर स्टार्मर का इस्तीफा देने से साफ इनकार

Epstein Scandal 2026: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर इस समय अपने कार्यकाल के सबसे बड़े राजनीतिक भंवर में फंसे हुए हैं। ‘एपस्टीन फाइल्स’ (Epstein Files) के सार्वजनिक होने के बाद लेबर पार्टी के भीतर असंतोष की लहर दौड़ गई है। पीटर मैंडेलसन का नाम इस विवादित सूची में आने के बाद प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग तेज हो गई है। हालांकि, स्टार्मर ने झुकने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने पद से पीछे नहीं हटेंगे। ब्रिटिश संसद में दिए गए एक आक्रामक बयान में उन्होंने कहा कि वे देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और इस चुनौती का डटकर सामना करेंगे।

विवाद की जड़: पीटर मैंडेलसन और जेफ्री एपस्टीन के संबंध

इस पूरे बवाल की शुरुआत पीटर मैंडेलसन की वॉशिंगटन में ब्रिटेन के राजदूत के रूप में नियुक्ति से हुई। हाल ही में सामने आए दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि मैंडेलसन के संबंध कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ थे। आलोचकों और विपक्षी दलों का कहना है कि इतने संवेदनशील और महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति करने से पहले मैंडेलसन की पृष्ठभूमि की गहन जांच (Vetting) क्यों नहीं की गई? जनता और सांसदों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार ने जानबूझकर इन तथ्यों को नजरअंदाज किया।

लेबर पार्टी में बगावत: अपनों ने ही खोला मोर्चा

स्टार्मर के लिए सबसे बड़ी चुनौती विपक्ष से नहीं, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर से आ रही है। लेबर पार्टी के कई सांसदों ने खुलकर प्रधानमंत्री की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए हैं। स्कॉटलैंड के लेबर नेता एनास सरवर ने तो यहां तक कह दिया है कि डाउनिंग स्ट्रीट (Downing Street) को अब नए और बेदाग नेतृत्व की जरूरत है। पार्टी के भीतर यह डर घर कर गया है कि इस विवाद के कारण जनता के बीच लेबर पार्टी की साख बुरी तरह गिर सकती है, जिसका असर भविष्य के चुनावों पर पड़ेगा।

आक्रामक मूड में पीएम: ‘हर लड़ाई लड़ना और जीतना जानता हूँ’

भारी दबाव के बीच कीर स्टार्मर ने लेबर सांसदों की एक आपातकालीन बैठक को संबोधित किया। सूत्रों के अनुसार, यह भाषण काफी भावुक और दृढ़ था। स्टार्मर ने सांसदों से कहा, “मैंने अपने जीवन में हर कानूनी और राजनीतिक लड़ाई जीती है, और मैं इस संकट को भी पार करूँगा।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी भी कीमत पर पद नहीं छोड़ेंगे और अंतिम सांस तक अपनी नीतियों और फैसलों के लिए लड़ते रहेंगे। उनके इस कड़े रुख ने पार्टी के बागी गुट को थोड़ा शांत जरूर किया है, लेकिन खतरा टला नहीं है।

वरिष्ठ मंत्रियों का साथ और पद से इस्तीफे का सिलसिला

संकट के इस दौर में डिप्टी पीएम डेविड लैमी और विदेश मंत्री यवेट कूपर स्टार्मर के साथ मजबूती से खड़े नजर आ रहे हैं। वहीं, सरकार को इस विवाद की कीमत भी चुकानी पड़ी है। प्रधानमंत्री के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने नियुक्ति प्रक्रिया में हुई चूक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दूसरी ओर, पुलिस अब मैंडेलसन के खिलाफ सार्वजनिक पद के दुरुपयोग के पुराने आरोपों की जांच कर रही है। हालांकि उन पर कोई प्रत्यक्ष यौन आरोप नहीं है, लेकिन जांच के दायरे में आने से सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

आगे की राह: दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का वादा

ब्रिटिश संसदीय प्रणाली में प्रधानमंत्री को बिना आम चुनाव के भी हटाया जा सकता है, जिससे राजनीतिक अनिश्चितता बनी हुई है। स्टार्मर ने डैमेज कंट्रोल करते हुए एपस्टीन के पीड़ितों से माफी मांगी है और नियुक्ति से जुड़े सभी गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने का वादा किया है। विपक्ष की नेता केमी बैडेनोच इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रही हैं। अब सारा दारोमदार इस बात पर है कि क्या स्टार्मर अपनी कैबिनेट को एकजुट रखकर इस संकट से बाहर निकल पाते हैं या नहीं।

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