अंतरराष्ट्रीय

Kenya School Fire : केन्या के उतुमिशी गर्ल्स अकादमी में तड़के सुबह मची तबाही, भीषण आग ने ली मासूमों की जान

Kenya School Fire : केन्या के नकुरु काउंटी के अंतर्गत आने वाले गिलगिल क्षेत्र से एक बेहद दर्दनाक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां स्थित उतुमिशी गर्ल्स अकादमी के एक छात्रावास (डॉर्मिटरी) में गुरुवार तड़के अचानक भीषण आग लग गई, जिसने देखते ही देखते पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया। शुरुआती सरकारी और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, यह भयानक हादसा सुबह करीब 3:30 बजे हुआ, जब सभी छात्राएं गहरी नींद में सो रही थीं। अचानक लगी इस आग और धुएं के गुबार के कारण हॉस्टल में चीख-पुकार मच गई। इस भीषण अग्निकांड की खबर ने न केवल पीड़ित परिवारों को बल्कि पूरे केन्या देश को झकझोर कर रख दिया है। प्रशासन इस हादसे को हाल के वर्षों का सबसे बड़ा स्कूल हादसा मान रहा है।

युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य

जैसे ही हॉस्टल में आग लगने की सूचना प्रशासनिक महकमे को मिली, पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। केन्या रेड क्रॉस सोसाइटी और स्थानीय आपातकालीन सेवाएं बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत हरकत में आ गईं। घटनास्थल पर कई एम्बुलेंस टीमें, दमकल गाड़ियां और मनोवैज्ञानिक सहायता कर्मी आपातकालीन तौर पर पहुंचे। राहत-बचाव दल ने स्थानीय लोगों की मदद से धुआं उगलती हुई इमारत की खिड़कियों और दरवाजों को तोड़कर अंदर फंसी छात्राओं को बाहर निकालना शुरू किया। सुरक्षा और राहत कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत पूरे स्कूल परिसर को अपने घेरे में ले लिया और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी ताकि रेस्क्यू ऑपरेशन में कोई बाधा न आए।

अस्पतालों में जिंदगी की जंग लड़ रही हैं छात्राएं

इस भयावह अग्निकांड में हताहतों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे हर कोई सहमा हुआ है। हादसे के तुरंत बाद शुरुआती दौर में प्रशासन द्वारा 10 छात्राओं की मौत की आधिकारिक पुष्टि की गई थी। लेकिन दुर्भाग्यवश, अस्पतालों से आ रही खबरें बेहद परेशान करने वाली हैं। गंभीर रूप से झुलसी हुई छह और छात्राओं ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया, जिससे इस दुखद हादसे में मरने वाली मासूम बच्चियों की कुल संख्या बढ़कर अब 16 हो गई है। इसके अलावा, कम से कम 74 अन्य छात्राएं गंभीर रूप से घायल और झुलसी हुई हैं, जिनका सेंट जोसेफ अस्पताल समेत क्षेत्र के विभिन्न बड़े चिकित्सा केंद्रों और आईसीयू वार्डों में आपातकालीन इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, कई बच्चियों की हालत अब भी अत्यंत नाजुक बनी हुई है।

सरकार ने तैनात किए काउंसलिंग एक्सपर्ट

इस बेहद दर्दनाक हादसे ने जीवित बची छात्राओं और मृत बच्चियों के माता-पिता को गहरे मानसिक सदमे में डाल दिया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए केन्या के स्टेट डिपार्टमेंट फॉर चिल्ड्रेन सर्विसेज (बाल सेवा विभाग) ने एक बड़ा कदम उठाया है। विभाग ने प्रभावित स्कूल में काउंसलिंग विशेषज्ञों और मनोचिकित्सकों की विशेष टीमों को तैनात करने की आधिकारिक घोषणा की है। सरकार का कहना है कि इस भयावह मंजर को अपनी आंखों से देखने वाली डरी-सहमी छात्राओं, अपनी संतानों को खो चुके पीड़ित परिजनों, स्कूल के शिक्षकों और लगातार रेस्क्यू में जुटे राहतकर्मियों को इस गहरे सदमे से उबारने के लिए विशेष मनोसामाजिक सहायता और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं।

राष्ट्रपति विलियम रूटो ने जताया गहरा शोक

इस राष्ट्रीय त्रासदी पर केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने गहरा दुख और संवेदना व्यक्त की है। राष्ट्रपति रूटो ने सोशल मीडिया और आधिकारिक बयान के जरिए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी सहानुभूति प्रकट करते हुए कहा कि पूरा देश इस दुख की घड़ी में शोकाकुल परिवारों के साथ खड़ा है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य मंत्रालय को सख्त निर्देश दिए हैं कि अस्पतालों में भर्ती सभी घायल छात्राओं को बिना किसी देरी के सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं और मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाए। राष्ट्रपति ने आश्वस्त किया कि सरकार का पूरा ध्यान इस समय केवल और केवल प्रभावित लोगों की हर संभव सहायता करने और रेस्क्यू ऑपरेशन को तार्किक अंजाम तक पहुंचाने पर केंद्रित है।

शॉर्ट सर्किट या कोई और वजह?

उतुमिशी गर्ल्स अकादमी के छात्रावास में आग लगने की इस भयावह घटना के पीछे की असली वजह क्या थी, इसे लेकर अभी संशय बना हुआ है। स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीमों ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। शुरुआती कयासों में इसे बिजली के शॉर्ट सर्किट से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट सामने नहीं आ जाती, तब तक किसी नतीजे पर नहीं पहुंचा जा सकता। अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा है कि वर्तमान में उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता घायलों की जान बचाना और प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाना है, लेकिन इसके समानांतर हादसे की उच्च स्तरीय जांच भी शुरू कर दी गई है ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

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