Kerala Assembly Election 2026
Kerala Assembly Election 2026: भारतीय चुनाव आयोग ने रविवार को देश के पांच राज्यों के साथ-साथ केरल के लिए भी विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया है। केरल की सभी 140 विधानसभा सीटों पर इस बार 9 अप्रैल 2026 को एक ही चरण में मतदान संपन्न होगा। चुनाव की तारीखों की घोषणा के साथ ही राज्य में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार भी मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ एलडीएफ (LDF), जिसका नेतृत्व सीपीएम (CPIM) कर रही है, और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) गठबंधन के बीच होगा। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी राज्य की कई प्रमुख सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबला बनाने की पूरी कोशिश कर रही है।
चुनाव तारीखों के ऐलान के कुछ ही घंटों बाद मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुनावी दौड़ में बढ़त बना ली है। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह राज्य की कुल 140 सीटों में से 86 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी, जबकि शेष सीटें गठबंधन के अन्य घटक दलों के लिए छोड़ी गई हैं। रविवार को जारी सूची में 86 में से 81 उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप दे दिया गया है। इनमें से 75 उम्मीदवार सीधे तौर पर सीपीएम के चुनाव चिन्ह पर लड़ेंगे, जबकि पार्टी ने 6 सीटों पर प्रभावशाली निर्दलीय उम्मीदवारों को अपना समर्थन देने का फैसला किया है।
सत्तारूढ़ दल ने इस बार भी अपने अनुभवी चेहरों पर भरोसा जताया है। केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन अपनी पारंपरिक सीट धर्मडम से ही चुनाव मैदान में उतरेंगे। पार्टी की सूची में निरंतरता और अनुभव का तालमेल देखने को मिल रहा है, जिसके तहत 11 मौजूदा मंत्रियों और 54 सिटिंग विधायकों को फिर से टिकट दिया गया है। दूसरी ओर, विपक्षी खेमे में भी हलचल तेज है। कांग्रेस ने घोषणा की है कि यूडीएफ (UDF) गठबंधन की सभी 140 सीटों के उम्मीदवारों की अंतिम सूची आज ही जारी कर दी जाएगी, जिससे मुकाबला और भी रोचक होने की उम्मीद है।
चुनाव से ठीक पहले आए MATRIZE-IANS के ओपिनियन पोल ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को और भी स्पष्ट कर दिया है। पोल के आंकड़ों के अनुसार, केरल में इस बार बेहद करीबी मुकाबला होने जा रहा है। ओपिनियन पोल का अनुमान है कि वामपंथी गठबंधन (LDF) को 140 में से 61 से 71 सीटें मिल सकती हैं, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ (UDF) को 58 से 69 सीटें मिलने की संभावना है। आंकड़ों को देखें तो सत्ता की चाबी किसी भी तरफ झुक सकती है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी के खाते में 2 सीटें जाने का अनुमान लगाया गया है, जो राज्य में भाजपा की बढ़ती सक्रियता को दर्शाता है।
केरल के चुनावी इतिहास में सत्ता परिवर्तन एक सामान्य प्रक्रिया रही है, लेकिन पिछला चुनाव जीतकर एलडीएफ ने इस परंपरा को तोड़ा था। इस बार पिनरायी विजयन के सामने अपनी सरकार की जन कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के दम पर फिर से सत्ता में वापसी करने की बड़ी चुनौती है। वहीं, भ्रष्टाचार और अन्य स्थानीय मुद्दों को लेकर यूडीएफ जनता के बीच जा रही है। 9 अप्रैल को होने वाली वोटिंग यह तय करेगी कि केरल की जनता ‘निरंतरता’ को चुनती है या ‘परिवर्तन’ को। आने वाले कुछ हफ्तों में रैलियों और प्रचार अभियानों के जरिए चुनावी पारा और अधिक चढ़ने वाला है।
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