Kerala BJP News
Kerala BJP News: केरल स्थानीय निकाय चुनाव 2025 के नतीजे घोषित हो चुके हैं, लेकिन राज्य के मुनंबम इलाके का चुनाव परिणाम इस समय सबसे अधिक सुर्खियां बटोर रहा है। इस संवेदनशील क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जीत हासिल की है, जिसकी वजह यहाँ चल रहा वक्फ प्रॉपर्टी विवाद है। इस जीत को आगामी विधानसभा चुनावों के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक मोड़ माना जा रहा है।
मुनंबम वह क्षेत्र है जहाँ लगभग 500 ईसाई परिवार रहते हैं। वक्फ संशोधन अधिनियम लागू होने के बाद, इन परिवारों को अपनी जमीन और घरों से बेदखल किए जाने का डर सता रहा था। इस कठिन समय में, केरल BJP और केंद्र की मोदी सरकार ने इन पीड़ित परिवारों का पुरजोर साथ दिया। इस समर्थन के परिणामस्वरूप, स्थानीय ईसाई समुदाय ने इस निकाय चुनाव में BJP को एकजुट होकर वोट दिया, जिससे पार्टी को मुनंबम में जीत मिली।
केरल BJP के महासचिव अनूप एंटनी जोसेफ ने मुनंबम की इस जीत को ऐतिहासिक बताया है। उनका मानना है कि यह जीत अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होगी। यह चुनावी सफलता केरल में BJP के लिए ईसाई समुदाय के बढ़ते समर्थन और वोट बैंक के रूप में देखी जा रही है। इस जीत ने वक्फ जैसे संवेदनशील मुद्दे को राज्य की राजनीति के केंद्र में ला दिया है, जिस पर BJP अब आगामी विधानसभा चुनावों की दिशा तय करने के लिए आक्रामक राजनीति अपना सकती है।
मुनंबम वक्फ विवाद की जड़ें आज से लगभग 70 साल पहले, यानी 1950 में हैं। तब सिद्दीकी सैत नामक व्यक्ति ने जिस जमीन पर ये 500 परिवार बसे थे, उसे फरीद कॉलेज को दान में दिया था। कॉलेज प्रशासन ने इस जमीन का कुछ हिस्सा उन लोगों को बेच दिया, जो उस पर लंबे समय से बसे हुए थे।
समस्या तब शुरू हुई जब साल 2019 में केरल वक्फ बोर्ड ने इस जमीन को वक्फ प्रॉपर्टी घोषित कर दिया और इसे वक्फ बोर्ड के तहत रजिस्टर्ड कर दिया। इस पंजीकरण के कारण, जमीन को लेकर हुए सभी पुराने सौदे और समझौते अमान्य हो गए, जिससे जमीन पर रहने वाले सैकड़ों परिवारों को अपने आशियाने से बेदखल होने का खतरा पैदा हो गया।
वक्फ बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ मुनंबम और चेराई इलाकों के निवासियों ने 410 दिनों तक लंबा आंदोलन चलाया। पीड़ित लोगों ने इस फैसले को कोझिकोड वक्फ ट्रिब्यूनल में चुनौती दी। राज्य सरकार ने भी मामले की जांच के लिए सीएन रामचंद्रन नायर आयोग का गठन किया।
हालांकि, केरल हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने साल 2025 में इस आयोग को भंग कर दिया। बाद में डिवीजन बेंच ने आयोग को बहाल किया और साल 2019 में हुए जमीन के वक्फ रजिस्ट्रेशन को अवैध करार दिया।
वर्तमान में यह मामला सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने गत 12 दिसंबर को ही केरल हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मामले में हाई कोर्ट के फैसले से पहले की जो स्थिति बनी हुई थी, उसे ही बरकरार रखा जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह यथास्थिति जनवरी 2026 तक बरकरार रहेगी और इस दौरान किसी को भी जमीन से बेदखल नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री पिनराई विजयन भी लोगों को सार्वजनिक रूप से आश्वासन दे चुके हैं कि इस जमीन पर रहने वाले परिवारों को जबरन बेदखल नहीं किया जाएगा। BJP की मुनंबम जीत ने अब इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है, जिसका सीधा असर केरल की भविष्य की राजनीति पर पड़ने की संभावना है।
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