Kerala Exit Poll 2026
Kerala Exit Poll 2026 : केरलम विधानसभा चुनाव 2026 के लिए मतदान की प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई है, और अब सबकी निगाहें ‘एग्जिट पोल’ के नतीजों पर टिकी हैं। केरल की राजनीति ऐतिहासिक रूप से एक अनोखी परंपरा के लिए जानी जाती है, जिसे ‘एंटी-इंकंबेंसी’ या हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन का चलन कहा जाता है। हालांकि, पिछले चुनाव में एलडीएफ (LDF) ने इस परंपरा को तोड़कर इतिहास रचा था, लेकिन 2026 के एग्जिट पोल संकेत दे रहे हैं कि राज्य एक बार फिर अपनी पुरानी परंपरा की ओर लौट सकता है। विभिन्न सर्वेक्षणों के रुझान एक अत्यंत रोमांचक और कांटे की टक्कर की ओर इशारा कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए आए प्रमुख एग्जिट पोल्स के आंकड़े बताते हैं कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ (UDF) इस बार सत्ता की दौड़ में आगे निकलता दिख रहा है। ‘एक्सिस माई इंडिया’ (Axis My India) के सर्वेक्षण के अनुसार, यूडीएफ को 78 से 90 सीटें मिल सकती हैं, जो बहुमत के 71 के आंकड़े से कहीं अधिक है। वहीं, सत्तारूढ़ एलडीएफ को केवल 49-62 सीटों पर सिमटते हुए दिखाया गया है। ‘पीपल्स पल्स’ (Peoples Pulse) का अनुमान भी इसी दिशा में है, जिसमें यूडीएफ को 75-85 सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। इन आंकड़ों से साफ है कि सत्ता विरोधी लहर इस बार एलडीएफ के किले में सेंध लगाने में सफल होती दिख रही है।
जहाँ अन्य एजेंसियां यूडीएफ को स्पष्ट बढ़त दे रही हैं, वहीं ‘मैटराइज’ (Matrize) का सर्वे थोड़ा अलग और बेहद करीबी मुकाबला दिखा रहा है। मैटराइज के अनुसार, यूडीएफ को 70 से 75 सीटें मिल सकती हैं, जबकि एलडीएफ 60 से 65 सीटों के साथ कड़ी टक्कर दे रहा है। इस सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि केरल में मुकाबला अभी भी ‘ओपन’ है और कुछ ही सीटों का हेरफेर मुख्यमंत्री की कुर्सी का फैसला कर सकता है। इस एग्जिट पोल ने एलडीएफ के समर्थकों की उम्मीदें बरकरार रखी हैं, जबकि यूडीएफ के लिए यह ‘बहुमत के किनारे’ वाली स्थिति है।
केरल की द्विध्रुवीय राजनीति (LDF बनाम UDF) के बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) अपनी जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है। एग्जिट पोल्स के अनुसार, बीजेपी को इस बार 0 से 5 सीटों के बीच सफलता मिल सकती है। मैटराइज ने बीजेपी को 3-5 सीटें दी हैं, जबकि अन्य सर्वे उन्हें 0-3 के बीच रख रहे हैं। हालांकि बीजेपी का सीट शेयर कम दिख रहा है, लेकिन उनका बढ़ता वोट प्रतिशत भविष्य के त्रिकोणीय संघर्ष की नींव रख सकता है। केरल में बीजेपी के लिए एक भी सीट जीतना बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, क्योंकि यहाँ की राजनीतिक जमीन पारंपरिक रूप से वामपंथी और कांग्रेस विचारधाराओं के बीच बंटी रही है।
| Alliance / Party | Zeenia Survey (Seats) | Matrize Poll (Seats) |
| UDF (Congress+) | 67 – 70 | 58 – 69 |
| LDF (CPI(M)+) | 62 – 67 | 61 – 71 |
| NDA (BJP+) | 03 – 04 | 02 – 03 |
| Others | 00 – 02 | 02 – 08 |
2026 के इस चुनाव में केरल की जनता ने विकास, उच्च शिक्षा, अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक कल्याण की योजनाओं को प्राथमिकता दी है। राज्य सरकार की आपदा प्रबंधन की कार्यप्रणाली और कोविड-19 के बाद की आर्थिक बहाली भी बड़े मुद्दे रहे हैं। दूसरी ओर, विपक्ष ने भ्रष्टाचार के आरोपों और प्रशासनिक विफलता को हथियार बनाकर जनता के बीच पैठ बनाई। केरल की शिक्षित और जागरूक जनता ने इस बार साइलेंट वोटिंग की है या नहीं, यह समझना एग्जिट पोल के लिए भी एक चुनौती रही है।
केरल की राजनीति में अंतिम नतीजे अक्सर एग्जिट पोल के अनुमानों को झुठला देते हैं। 140 सीटों पर हुए इस महामुकाबले का असली परिणाम 4 मई को मतगणना के बाद ही साफ होगा। क्या पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाला एलडीएफ फिर से चमत्कार करेगा, या यूडीएफ की ‘वापसी की लहर’ उन्हें सत्ता से बेदखल कर देगी? केरल का यह चुनाव न केवल राज्य के लिए बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वामपंथ के आखिरी गढ़ की दिशा तय करेगा। फिलहाल, एग्जिट पोल ने यूडीएफ के खेमे में खुशियां और एलडीएफ के खेमे में मंथन का दौर शुरू कर दिया है।
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