Kerala Vande Mataram Row: केरल में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रमों के दौरान ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाने के निर्देश ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। 6 अगस्त को मुख्य सचिव विश्वनाथ सिन्हा की ओर से जारी सर्कुलर के बाद राज्य में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। सर्कुलर में आजादी के दिन से जुड़े आयोजनों के दौरान ‘वंदे मातरम्’ को पूरा गाने का निर्देश दिया गया है। इस आदेश को लेकर सरकार पर विपक्ष और उसके राजनीतिक सहयोगियों की ओर से सवाल उठाए जा रहे हैं।

मुख्य सचिव के सर्कुलर में क्या कहा गया
मुख्य सचिव के कार्यालय से जारी सर्कुलर में स्वतंत्रता दिवस से जुड़े कार्यक्रमों के तहत राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण की प्रस्तुति का निर्देश दिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर जारी इस निर्देश के सामने आने के बाद मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया। विपक्षी दलों ने सरकार से पूछा है कि सरकारी आयोजनों में पूरे गीत को अनिवार्य करने का फैसला किस आधार पर लिया गया।

कांग्रेस और वाम दलों पर बढ़ा दबाव
इस आदेश ने कांग्रेस और उसके सहयोगी राजनीतिक समूहों के सामने भी चुनौती खड़ी कर दी है। केरल में कांग्रेस और CPI(M) लंबे समय से ‘वंदे मातरम्’ के पूर्ण संस्करण को सरकारी कार्यक्रमों में गाने को लेकर आपत्तियां जताते रहे हैं। अब सर्कुलर को लेकर विपक्षी दल सरकार पर निशाना साध रहे हैं। उनका आरोप है कि इस फैसले से राज्य की धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक परंपरा प्रभावित हो सकती है।
CPI(M) ने सरकार पर साधा निशाना
CPI(M) ने मुख्य सचिव के सर्कुलर को राजनीतिक मुद्दा बना लिया है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि सरकार संघ परिवार के एजेंडे के दबाव में आकर ऐसा निर्णय ले रही है। विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने भी पूरे ‘वंदे मातरम्’ को गाने के निर्देश पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि धर्मनिरपेक्ष राजनीति की बात करने वाली सरकार ने इस तरह का आदेश क्यों जारी किया।
हर घर तिरंगा अभियान से जुड़ा मामला
सर्कुलर के अनुसार, केंद्र के ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के 2026 संस्करण को ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित देशव्यापी कार्यक्रमों के तीसरे चरण के साथ जोड़ा गया है। बताया गया है कि इस कार्यक्रम के एकीकरण को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति से मंजूरी मिली थी। इसी संदर्भ में स्वतंत्रता दिवस आयोजनों के लिए निर्देश जारी किए गए।

पूरे गीत के निर्देश ने बदला विवाद का स्वरूप
राजनीतिक विवाद की मुख्य वजह प्रशासनिक कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाने का निर्देश बताया जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि यदि केवल राष्ट्रीय गीत की प्रस्तुति का निर्देश होता तो मामला इतना बड़ा नहीं बनता। लेकिन पूरे गीत को गाने की बात सामने आने के बाद पुराने राजनीतिक और वैचारिक मतभेद फिर चर्चा में आ गए हैं।
राज्यपाल के कार्यालय ने दबाव से किया इनकार
विवाद के बीच राज्य सरकार की ओर से राज्यपाल के कार्यालय की भूमिका की ओर संकेत किए जाने की चर्चा भी हुई। हालांकि, केरल लोक भवन ने किसी तरह का दबाव बनाए जाने से इनकार किया है। राज्यपाल के कार्यालय के इस रुख के बाद सवाल और गंभीर हो गया कि मुख्य सचिव के सर्कुलर में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाने का निर्देश आखिर किस आधार पर शामिल किया गया।
केरल में संवेदनशील रहा है यह मुद्दा
केरल में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर विवाद नया नहीं है। विशेष रूप से गीत के बाद के छंदों में धार्मिक प्रतीकों और हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी छवियों को लेकर लंबे समय से राजनीतिक बहस होती रही है। CPI(M), कांग्रेस, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग समेत कई राजनीतिक समूहों का तर्क रहा है कि धर्मनिरपेक्ष सरकारी कार्यक्रमों में इन हिस्सों को शामिल करने से विवाद पैदा हो सकता है। वहीं BJP और उसके NDA सहयोगी इस तरह की आपत्तियों को लगातार खारिज करते रहे हैं।
कांग्रेस नेता राजमोहन उन्नीथान का तीखा बयान
विवाद के बीच केरल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजमोहन उन्नीथान ने भी कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि चाहे उन्हें गोली ही क्यों न मार दी जाए, वह ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण नहीं गाएंगे। उनके इस बयान ने मामले को और राजनीतिक गर्मी दे दी है और कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर बहस तेज होने की संभावना है।
15 अगस्त के कार्यक्रमों पर टिकी नजर
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के सरकारी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम्’ को लेकर राज्य सरकार का वास्तविक रुख क्या रहेगा। मुख्य सचिव के सर्कुलर, राज्यपाल कार्यालय के बयान और विपक्षी दलों की आपत्तियों के बीच सरकार के सामने संतुलन बनाने की चुनौती है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
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