Iran US War : पश्चिम एशिया में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच तेहरान की ओर से संघर्ष के संभावित विस्तार को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मुज्तबा खामेनेई के सलाहकार मेजर जनरल याह्या रहीम सफवी ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका या इजरायल की ओर से दोबारा हमला किया जाता है, तो युद्ध का दायरा हिंद महासागर तक फैल सकता है। यह बयान 24 सितंबर को सामने आया।
पर्सियन गल्फ से लाल सागर तक पहुंचा संघर्ष
सफवी ने ईरान की फर्स न्यूज एजेंसी द्वारा जारी वीडियो में कहा कि मौजूदा संघर्ष पर्सियन गल्फ और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आगे बढ़कर लाल सागर तक पहुंच चुका है। उनके मुताबिक, यदि दोबारा युद्ध शुरू होता है तो संघर्ष का मोर्चा हिंद महासागर या उससे भी आगे तक बढ़ सकता है। हालांकि, यह बयान संभावित प्रतिक्रिया की चेतावनी है, किसी नए सैन्य अभियान की औपचारिक घोषणा नहीं।
अमेरिका और इजरायल को लेकर ईरान की चेतावनी
ईरानी सैन्य सलाहकार ने कहा कि यदि अमेरिका या इजरायल की ओर से नया हमला होता है, तो ईरानी सशस्त्र बल संभावित सबसे खराब परिस्थितियों के लिए तैयार हैं। सफवी के बयान में संघर्ष के भौगोलिक विस्तार की संभावना का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इससे संकेत मिलता है कि तेहरान किसी नए हमले की स्थिति में अपनी प्रतिक्रिया का दायरा बदलने की चेतावनी दे रहा है।
लाल सागर और बाब अल-मंदेब का जिक्र
सफवी ने लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने यमन में सक्रिय हूती समूह का संदर्भ देते हुए कहा कि अमेरिका की ओर से नया युद्ध शुरू होने की स्थिति में लाल सागर और बाब अल-मंदेब को केंद्र बनाकर एक नया मोर्चा खुल सकता है। बाब अल-मंदेब वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण जलमार्ग है और इसका संबंध लाल सागर तथा स्वेज नहर के रास्ते यूरोप और एशिया की आवाजाही से है।
समुद्री मार्गों पर पहले से बढ़ा दबाव
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर पहले से दिखाई दे रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य स्थिति की तुलना में काफी कम हुई है। रॉयटर्स के अनुसार, 21 सितंबर को उपलब्ध शिपिंग डेटा में सप्ताहांत के दौरान इस जलडमरूमध्य से 17 कमोडिटी जहाजों के गुजरने की जानकारी सामने आई, जबकि एक सप्ताह पहले यह संख्या 37 थी। युद्ध से पहले यहां प्रतिदिन करीब 125 बड़े वाणिज्यिक जहाज गुजरते थे।
IRGC ने भी दी थी संघर्ष बढ़ने की चेतावनी
सफवी के बयान से कुछ दिन पहले ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने भी अमेरिका को चेतावनी दी थी। 21 सितंबर को IRGC के प्रवक्ता होसैन मोहेबी ने कहा था कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो ईरान अपनी सैन्य रणनीति, हथियारों और लक्ष्यों में बदलाव कर सकता है। उन्होंने युद्ध के भूगोल को बदलने की बात भी कही थी।
हिंद महासागर तक तनाव पहुंचने पर भारत पर असर
यदि संघर्ष का दायरा वास्तव में हिंद महासागर तक बढ़ता है, तो भारत सहित समुद्री व्यापार पर निर्भर देशों के लिए जोखिम बढ़ सकते हैं। खाड़ी क्षेत्र से आने वाले ऊर्जा उत्पादों और अन्य सामानों की समुद्री आवाजाही प्रभावित होने पर जहाजों की सुरक्षा, बीमा और माल ढुलाई लागत पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, फिलहाल यह संभावित स्थिति है और इसका वास्तविक असर संघर्ष के अगले घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।
तेल और ऊर्जा आपूर्ति पर भी नजर
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लाल सागर जैसे मार्गों पर लंबे समय तक व्यवधान रहने की स्थिति में वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकते हैं। रॉयटर्स के अनुसार, मौजूदा संकट के दौरान खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस की आवाजाही के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन इससे परिवहन लागत भी बढ़ रही है।
संघर्ष का दायरा बढ़ा तो बढ़ेंगी वैश्विक चिंताएं
ईरान की ताजा चेतावनी ने पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष को लेकर नई चिंता पैदा की है। अभी तक हिंद महासागर तक युद्ध फैलने की बात ईरानी अधिकारी की चेतावनी के रूप में सामने आई है। यदि क्षेत्रीय तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। आने वाले दिनों में अमेरिका, इजरायल और ईरान की सैन्य तथा कूटनीतिक गतिविधियां इस स्थिति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहेंगी।
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