Khandwa youth suicide
Khandwa youth suicide: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ अंधविश्वास और मानसिक विकार के घातक मेल ने एक युवा जान ले ली। खालवा थाना क्षेत्र के अंबापाट गांव में 25 वर्षीय एक युवक ने ‘ऊपरी साये’ के डर से जहर खाकर आत्महत्या कर ली। मूल रूप से महाराष्ट्र का रहने वाला यह युवक तंत्र-मंत्र के जरिए अपना इलाज कराने खंडवा आया था, लेकिन विज्ञान और चिकित्सा के बजाय झाड़-फूंक का सहारा लेना उसके लिए जानलेवा साबित हुआ। यह घटना आधुनिक समाज में आज भी जड़ जमाए अंधविश्वास की कड़वी हकीकत को बयां करती है।
मृतक की पहचान 25 वर्षीय रामदास के रूप में हुई है, जो पिछले काफी समय से गंभीर मानसिक अशांति का सामना कर रहा था। रामदास के परिजनों ने पुलिस को दिए बयान में एक अजीबोगरीब दावा किया है। उनके अनुसार, रामदास अक्सर कहता था कि उसे सपने में तीन रहस्यमयी महिलाएं दिखाई देती हैं जो उसे डराती और प्रताड़ित करती हैं। वह इस कदर खौफजदा था कि उसे लगने लगा था कि उस पर किसी ने ‘बाहरी बाधा’ या ‘काला जादू’ कर दिया है। इसी डर ने उसे धीरे-धीरे मानसिक रूप से इतना कमजोर कर दिया कि वह हकीकत और वहम के बीच का अंतर भूल गया।
रामदास की बिगड़ती स्थिति को देखकर उसके परिजनों ने उसे डॉक्टर को दिखाने के बजाय अंधविश्वास का रास्ता चुनना बेहतर समझा। उन्हें किसी ने बताया कि खंडवा के अंबापाट गांव में एक तांत्रिक ऐसी ‘ऊपरी बाधाओं’ का शर्तिया इलाज करता है। इसी उम्मीद में परिजन रामदास को लेकर अंबापाट पहुंचे और वहां उसकी बहन के घर रुक गए। उनका मानना था कि तांत्रिक की शक्तियों से उन तीन ‘सपनों वाली औरतों’ से रामदास को मुक्ति मिल जाएगी।
रामदास के भाई प्रकाश ने पुलिस को बताया कि यह समस्या पुरानी थी। कुछ समय पहले भी एक तांत्रिक द्वारा झाड़-फूंक कराने के बाद रामदास करीब तीन महीने तक बिल्कुल सामान्य रहा था। लेकिन हाल ही में वह डर फिर से लौट आया। रामदास ने बार-बार शिकायत की कि वे तीन औरतें उसे चैन से जीने नहीं दे रही हैं और उसे अपने साथ बुला रही हैं। इसी मानसिक दबाव को न झेल पाने के कारण गुरुवार को वह गांव के नजदीकी जंगल में गया और वहां जहरीला पदार्थ खा लिया।
जहर के असर से जब रामदास की तबीयत बिगड़ने लगी, तो परिजन उसे आनन-फानन में जिला अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन देर रात रामदास ने दम तोड़ दिया। खालवा थाना पुलिस ने इस मामले में मर्ग कायम कर शव का पोस्टमार्टम कराया है। पुलिस अब इस पहलू पर भी जांच कर रही है कि क्या युवक को आत्महत्या के लिए उकसाया गया था या फिर यह केवल मानसिक भ्रम और अंधविश्वास का मामला है।
इस दुखद घटना पर मनोचिकित्सकों का कहना है कि जिसे ग्रामीण इलाकों में ‘ऊपरी साया’ कहा जाता है, वह अक्सर सिजोफ्रेनिया (Schizophrenia) या विजुअल हेलुसिनेशन जैसी गंभीर मानसिक बीमारी होती है। इसमें मरीज को ऐसी चीजें दिखाई देती हैं या आवाजें सुनाई देती हैं जो वास्तव में होती ही नहीं हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र मरीज की स्थिति को और बिगाड़ देते हैं। यदि रामदास को समय पर सही मनोचिकित्सीय उपचार और काउंसलिंग मिलती, तो शायद आज वह जीवित होता।
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