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Khet Bachao Abhiyan : खेत बचाओ अभियान शुरू, किसानों को मिलेगी वैज्ञानिक खेती की सलाह

Khet Bachao Abhiyan : केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियान शुरू करने का निर्णय लिया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे देश में ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाया जाएगा। यह अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं होगा, बल्कि किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, पंचायतों और स्थानीय संस्थाओं की भागीदारी से एक व्यापक जन आंदोलन का रूप लेगा।

खेती और मिट्टी की सेहत सुधारने पर रहेगा फोकस

सरकार का मानना है कि लगातार बढ़ते रासायनिक उर्वरकों के असंतुलित उपयोग से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित हो रही है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य खेतों की उत्पादकता बनाए रखना और मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करना है। अभियान के तहत किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि भविष्य में कृषि उत्पादन और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रह सकें।

कृषि मंत्री ने तैयारियों की समीक्षा बैठक की

अभियान की तैयारियों को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में कृषि मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, कृषि वैज्ञानिकों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान मंत्री ने अभियान की रूपरेखा, कार्ययोजना और उसके प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की।

‘कम खाद, सही खाद और सही सलाह’ होगा मुख्य मंत्र

बैठक में कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया कि अभियान का मूल उद्देश्य किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि ‘कम खाद, सही खाद और सही सलाह’ इस अभियान का प्रमुख संदेश होगा। किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर खाद के उपयोग की जानकारी दी जाएगी, जिससे अनावश्यक खर्च कम होगा और भूमि की गुणवत्ता बेहतर बनी रहेगी।

जैविक खेती और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन को बढ़ावा

सरकार इस अभियान के माध्यम से जैविक खेती और जैव-उत्पादों के उपयोग को भी बढ़ावा देगी। इसके अलावा एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (आईएनएम) को प्रोत्साहित किया जाएगा, ताकि रासायनिक और जैविक संसाधनों के संतुलित उपयोग से फसल उत्पादन बढ़ाया जा सके। इससे किसानों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

पंचायत स्तर से शुरू होगा अभियान

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस अभियान की सफलता के लिए इसे गांव और पंचायत स्तर से संचालित किया जाएगा। पंचायत प्रतिनिधि, कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), राज्य सरकारें और जनप्रतिनिधि मिलकर इस कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाएंगे। सरकार का उद्देश्य इसे केवल सरकारी योजना तक सीमित न रखकर जनभागीदारी आधारित अभियान बनाना है।

गांवों से तैयार होगी परिवर्तन की नई पहल

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह कार्यक्रम ऊपर से थोपा हुआ नहीं होगा, बल्कि गांवों की जरूरतों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार विकसित किया जाएगा। किसानों की समस्याओं और सुझावों को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे अभियान अधिक प्रभावी और परिणामकारी बन सके।

मौसम और बाजार के अनुसार मिलेगी सलाह

बैठक के दौरान कृषि मंत्री ने बदलते मौसम और कृषि क्षेत्र की चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि किसानों को मौसम, मिट्टी की स्थिति और बाजार की मांग के अनुसार व्यावहारिक एवं वैज्ञानिक सलाह प्रदान की जाएगी। इससे किसान बेहतर निर्णय ले सकेंगे और संभावित नुकसान को कम कर पाएंगे।अभियान के तहत कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने और जोखिम प्रबंधन की जानकारी देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही जल संरक्षण और संसाधनों के कुशल उपयोग को भी अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

1600 से अधिक टीमें करेंगी निगरानी और मार्गदर्शन

अभियान को सफल बनाने के लिए देशभर में 1600 से अधिक विशेष टीमों का गठन किया गया है। इनमें से 500 टीमें उन जिलों में कार्य करेंगी जहां उर्वरकों का उपयोग अधिक होता है। इसके अलावा कृषि विज्ञान केंद्रों और आईसीएआर की 1150 से अधिक टीमें किसानों को तकनीकी सहायता और मार्गदर्शन प्रदान करेंगी।

किसानों को योजनाओं का भी मिलेगा लाभ

अभियान के दौरान मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराना, पीएम-किसान योजना से वंचित लाभार्थियों को जोड़ना, दलहन-तिलहन मिशन को बढ़ावा देना और जल संरक्षण से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित की जाएंगी। इसके अलावा कृषि मशीनरी वितरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

परिणाम आधारित अभियान पर रहेगा सरकार का जोर

केंद्रीय कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के परिणाम स्पष्ट और मापने योग्य होने चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि खेत स्तर पर वास्तविक बदलाव दिखाई देना चाहिए। मंत्री ने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य खेतों की सुरक्षा, खेती की लागत में कमी, मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है।

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