Kim Jong Un Strategic
Kim Jong Un Strategic: उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए (KCNA) के अनुसार, किम जोंग उन ने बुधवार को उस विशेष संयंत्र का दौरा किया जहाँ परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी का निर्माण कार्य चल रहा है। इस दौरान उन्होंने काम की प्रगति पर संतोष जताया और इसे देश की सुरक्षा के लिए मील का पत्थर करार दिया। गौरतलब है कि अब तक दुनिया के केवल मुट्ठी भर देशों के पास ही परमाणु पनडुब्बी की तकनीक है, जिसे अमेरिका जैसे देश अपना सबसे गोपनीय सैन्य रहस्य मानते हैं। किम का यह कदम प्रशांत क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बिगाड़ने वाला माना जा रहा है।
अपनी इस यात्रा के दौरान किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया और अमेरिका के रक्षा सहयोग पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने विशेष रूप से उस हालिया समझौते की आलोचना की, जिसके तहत पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दक्षिण कोरिया को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियां बनाने की मंजूरी दी है। किम ने इसे उत्तर कोरिया के लिए एक सीधा “खतरा” बताया और कहा कि इसका मुकाबला करना अनिवार्य है। दिलचस्प बात यह है कि किम जोंग खुद ऐसी पनडुब्बी बना रहे हैं, लेकिन दक्षिण कोरिया की इसी कोशिश को वे ‘परमाणु डोमिनोज़ प्रभाव’ यानी एक विनाशकारी कुचक्र की शुरुआत बता रहे हैं।
किम जोंग ने केवल पनडुब्बियों पर ही ध्यान केंद्रित नहीं किया, बल्कि उन्होंने बुधवार को पूर्वी सागर (जापान सागर) के ऊपर “नए प्रकार की उच्च ऊंचाई वाली लंबी दूरी की एंटी-एयर मिसाइलों” के परीक्षण का भी निरीक्षण किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इन मिसाइलों ने 200 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित नकली लक्ष्यों को सटीकता से नष्ट किया। वैज्ञानिक दृष्टि से 100 किलोमीटर के बाद अंतरिक्ष की सीमा शुरू हो जाती है, जिसका अर्थ है कि किम की ये नई मिसाइलें अंतरिक्ष तक पहुँचने में सक्षम हैं। यह तकनीक भविष्य में उपग्रहों या लंबी दूरी के हवाई खतरों को नष्ट करने में इस्तेमाल की जा सकती है।
केसीएनए ने अपनी रिपोर्ट में एक और रहस्यमयी जानकारी साझा की है। किम जोंग उन ने “पानी के नीचे विकसित किए जा रहे नए गुप्त हथियारों” पर चल रहे शोध की समीक्षा की है। हालांकि ये हथियार क्या हैं, इसका विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि ये ‘न्यूक्लियर टॉरपीडो’ या ‘अंडरवॉटर ड्रोन्स’ हो सकते हैं। इसके साथ ही किम ने उत्तर कोरियाई नौसेना को पुनर्गठित करने और नई सामरिक इकाइयों की स्थापना के लिए एक व्यापक रणनीतिक योजना को भी मंजूरी दी है।
तानाशाह किम जोंग उन की इन गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच खलबली मचा दी है। तानाशाह के दौरे की तस्वीरों में उन्हें इंजीनियरों और सैन्य कमांडरों को निर्देश देते हुए देखा जा सकता है, जो उनके आक्रामक इरादों को स्पष्ट करती हैं। दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग बढ़ने के बाद से ही उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु परीक्षणों और मिसाइल प्रोग्राम की गति तेज कर दी है। किम जोंग का यह ताजा रुख संकेत देता है कि आने वाले समय में कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव और अधिक गहरा सकता है।
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