छत्तीसगढ़

Korba Elephant Menace : कोरबा में 53 हाथियों का तांडव, रात भर सो नहीं पाए ग्रामीण, खेतों में तबाही

Korba Elephant Menace :  छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार की रात धरमजयगढ़ वन मंडल की सीमा से निकलकर आए दो दंतैल हाथियों ने कुदमुरा रेंज के अंतर्गत आने वाले गीतकुंवारी गांव में जमकर उत्पात मचाया। इन हाथियों ने खेतों का रुख किया और वहां किसानों द्वारा बड़ी मेहनत से उगाई गई खड़ी धान की फसल को बुरी तरह रौंद दिया। वर्तमान में पूरा कोरबा जिला हाथियों की समस्या से जूझ रहा है और वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, इस समय जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में कुल 53 हाथी चार बड़े झुंडों में विभाजित होकर लगातार विचरण कर रहे हैं।

जटगा रेंज के मेउड़ पहाड़ पर 48 हाथियों के विशाल दल ने डाला डेरा

हाथियों की सबसे बड़ी सक्रियता कटघोरा वन मंडल के जटगा रेंज में देखी जा रही है। यहां के मेउड़ पहाड़ पर इस समय 48 हाथियों का एक विशाल दल डेरा जमाए हुए है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि हाथियों का यह झुंड पिछले मार्च महीने से ही कटोरीमोती के पास कुकरीचकहर इलाके से होते हुए मेउड़ पहाड़ के जंगलों में सक्रिय है। इस पहाड़ी क्षेत्र का घना जंगल हाथियों के अनुकूल है, जिसके कारण हाथियों का यह बड़ा कुनबा पिछले कई हफ्तों से इसी इलाके में घूम रहा है और अपनी गतिविधियां चला रहा है।

गर्मी के मौसम में मेउड़ पहाड़ पर हाथियों के ठहरने का मुख्य कारण

वन विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के मौसम में हाथियों के इस दल का जटगा रेंज में आना एक वार्षिक प्रक्रिया का हिस्सा है। हर साल यह झुंड करीब ढाई से तीन महीने का समय इसी क्षेत्र में बिताता है। दरअसल, 5 हजार हेक्टेयर से भी अधिक विशाल भू-भाग में फैले मेउड़ पहाड़ पर हाथियों के लिए पर्याप्त मात्रा में भोजन (चारा) और पानी के प्राकृतिक स्रोत उपलब्ध हैं। इसी प्रचुरता के कारण हाथी लंबे समय तक यहां रुकना पसंद करते हैं। हालांकि, चिंता की बात यह है कि कभी-कभी भोजन की तलाश में ये हाथी पहाड़ से नीचे उतरकर आबादी वाले गांवों की तरफ रुख कर लेते हैं।

पकी-पकाई धान की फसल हुई पूरी तरह बर्बाद, बेबस दिखे क्षेत्र के किसान

गीतकुंवारी गांव में घुसे दो दंतैल हाथियों ने जिन खेतों को निशाना बनाया, वहां कई एकड़ में लगी धान की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। पीड़ित किसानों और ग्रामीणों ने बताया कि फसल पूरी तरह पक चुकी थी और उसकी कटाई की तैयारियां चल रही थीं। हाथियों के आने की भनक लगते ही ग्रामीणों ने एकजुट होकर शोर मचाया, पटाखे फोड़े और मशाल जलाकर हाथियों को खदेड़ने का पुरजोर प्रयास किया। लेकिन जब तक हाथियों को आबादी और खेतों से दूर खदेड़ा जा सका, तब तक वे पैरों तले कुचलकर अधिकांश फसल को मटियामेट कर चुके थे, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

कुदमुरा, जटगा और पसान के ग्रामीण क्षेत्रों में पसरा भारी दहशत का माहौल

जंगल से सटे गांवों में हाथियों की इस अनवरत आवाजाही के कारण कुदमुरा, जटगा और पसान क्षेत्र के ग्रामीण बेहद डरे और सहमे हुए हैं। हाथियों के हमले के डर से लोग शाम ढलते ही अपने-अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं। इस दहशत का सीधा असर खेती-किसानी पर पड़ रहा है, क्योंकि किसान रात के समय अपने खेतों की रखवाली करने के लिए बाहर जाने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं। इस संकट की घड़ी में वन विभाग की टीम लगातार सक्रिय है और प्रभावित गांवों में मुनादी (लाउडस्पीकर से घोषणा) कराकर लोगों को रात में बाहर न निकलने और सतर्क रहने की चेतावनी दे रही है। इसके साथ ही ‘हाथी मित्र दल’ के सदस्य भी प्रभावित इलाकों में तैनात हैं।

वन विभाग द्वारा फसल मुआवजे का आकलन और ड्रोन कैमरों से आधुनिक निगरानी

ग्रामीणों की सुरक्षा और राहत के लिए वन विभाग ने ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि हाथियों द्वारा किए गए फसल नुकसान का सटीक आकलन करने के लिए मैदानी अमले को निर्देश दे दिए गए हैं, ताकि प्रभावित किसानों के लिए जल्द से जल्द मुआवजा प्रकरण तैयार कर उन्हें राहत राशि प्रदान की जा सके। इसके साथ ही, मेउड़ पहाड़ पर मौजूद 48 हाथियों के विशाल दल की गतिविधियों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखने के लिए आधुनिक तकनीक यानी ड्रोन कैमरों का सहारा लिया जा रहा है। ड्रोन ट्रैकिंग के जरिए वनकर्मी हाथियों के मूवमेंट की लाइव लोकेशन ट्रैक कर रहे हैं ताकि उन्हें रिहायशी इलाकों और बस्तियों में प्रवेश करने से पहले ही रोका जा सके।

प्रशासन की आम जनता से अपील: हाथियों के नजदीक जाने का जोखिम न लें

वन मंडल अधिकारी और प्रशासनिक अमले ने स्थानीय ग्रामीणों से धैर्य बनाए रखने और सुरक्षा नियमों का पालन करने की पुरजोर अपील की है। वन विभाग ने सख्त हिदायत दी है कि यदि जंगल या खेत के आसपास हाथी दिखाई दें, तो उनके बेहद करीब जाने का जोखिम बिल्कुल न उठाएं। लोग अकेले सुनसान रास्तों पर जाने से बचें और हाथियों को किसी भी तरह से उकसाने, उन पर पत्थर फेंकने या उन्हें परेशान करने का प्रयास न करें। हाथी दिखने पर तुरंत इसकी सूचना नजदीकी वन चौकी या हाथी मित्र दल के सदस्यों को दें, ताकि समय रहते सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकें और किसी भी प्रकार की जनहानि को टाला जा सके।

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