Korba Patwari Suspended : छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से भ्रष्टाचार का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसके बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है। मामला पसान तहसील के राजस्व हल्का नंबर 10 का है, जहां पदस्थ पटवारी विनोद अग्रवाल का एक ग्रामीण से कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। जैसे ही यह वीडियो प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में आया, विभाग में खलबली मच गई। मामले की संवेदनशीलता और गंभीरता को देखते हुए पोड़ी उपरोड़ा के एसडीएम (SDM) ने बिना किसी देरी के त्वरित एक्शन लिया और आरोपी पटवारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया। यह वीडियो और प्रशासनिक कार्रवाई अब पूरे जिले में टॉक ऑफ द टाउन बनी हुई है।
स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पसान क्षेत्र के भोले-भले ग्रामीणों से वन अधिकार पट्टा जारी करने और उससे जुड़े अन्य राजस्व कार्यों के बदले मोटी रकम मांगने की शिकायतें काफी समय से मिल रही थीं। इसी दौरान एक जागरूक नागरिक ने पटवारी विनोद अग्रवाल का रिश्वत लेते हुए छिपकर एक कथित वीडियो रिकॉर्ड कर लिया और उसे इंटरनेट पर अपलोड कर दिया। वन अधिकार पट्टा ग्रामीण और विशेषकर आदिवासी परिवारों के लिए आजीविका और जमीन के मालिकाना हक का एक अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है। ऐसे में हक की जमीन के लिए गरीब आदिवासियों से सरेआम पैसे मांगे जाने की इस घटना ने स्थानीय जनता के बीच भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग अब सोशल मीडिया पर भी सरकारी सिस्टम की शुचिता को लेकर तीखे सवाल खड़े कर रहे हैं।
रिश्वत का वीडियो जैसे ही वॉट्सऐप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, पोड़ी उपरोड़ा एसडीएम ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया। भ्रष्टाचार के प्रति कड़ा रुख अपनाते हुए एसडीएम ने शासकीय अवकाश (छुट्टी के दिन) होने के बावजूद तत्काल विभागीय आदेश जारी किया और आरोपी पटवारी विनोद अग्रवाल को शासकीय सेवा से निलंबित कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि सरकारी कामकाज में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार, लापरवाही या रिश्वतखोरी को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्राथमिक जांच में इस वायरल वीडियो को बेहद गंभीर और प्रामाणिक माना गया है, जिसके आधार पर यह निलंबन तय हुआ। इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब राजस्व विभाग के अन्य कर्मचारियों में भी हड़कंप मच गया है।
इस शर्मनाक घटना के सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों का दर्द भी छलक पड़ा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले गरीब परिवारों को अपने छोटे-छोटे राजस्व कार्यों, जैसे जमीन का नामांतरण, सीमांकन, ऋण पुस्तिका बनवाना और वन अधिकार पट्टा प्राप्त करने के लिए महीनों तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। सीधे-साधे ग्रामीणों की इस मजबूरी का फायदा उठाकर कई बार निचले स्तर के कर्मचारी भ्रष्टाचार को अंजाम देते हैं। इस घटना के बाद आक्रोशित आदिवासियों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से राजस्व विभाग के कामकाज में पूरी तरह से पारदर्शिता लाने और ऑनलाइन मॉनिटरिंग व्यवस्था को मजबूत करने की पुरजोर मांग की है।
वर्तमान में आरोपी पटवारी को सस्पेंड कर मुख्यालय अटैच कर दिया गया है और मामले की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। जिला प्रशासन अब इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रहा है कि क्या उक्त पटवारी के खिलाफ पहले भी इस तरह की अवैध वसूली की शिकायतें आई थीं। अधिकारियों का कहना है कि जांच का दायरा बढ़ाया जाएगा और यदि इस पूरे नेक्सस में किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी उतनी ही कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वे भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रहे हैं। अब पूरे कोरबा जिले की नजरें इस मामले की अंतिम जांच रिपोर्ट और पटवारी पर होने वाली कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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