Kota building collapse : राजस्थान की शिक्षा नगरी कोटा के तलवंडी इलाके में शनिवार की रात खुशगवार माहौल अचानक चीख-पुकार में बदल गया। रात के करीब 9 बजे, जब शहर अपनी सामान्य रफ्तार में था, तभी एक तीन मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस हृदयविदारक हादसे में एक कोचिंग छात्र समेत दो लोगों की जान चली गई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि धमाका इतना जोरदार था कि लगा जैसे कोई बड़ा बम फटा हो या आतिशबाजी हो रही हो। देखते ही देखते चारों तरफ धूल का गुबार छा गया और मलबे के नीचे दबे लोगों की ‘बचाओ-बचाओ’ की आवाजें गूंजने लगीं।

मलबे के नीचे दबी जिंदगी और SDRF का मोर्चा
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और SDRF (राज्य आपदा राहत बल) की टीमें सक्रिय हो गईं। मौके पर दृश्य अत्यंत विचलित करने वाला था; मलबे के बीच से कहीं किसी का हाथ बाहर दिखाई दे रहा था, तो कहीं किसी का पैर। लोग जान बचाने की गुहार लगा रहे थे। राहत और बचाव कार्य पूरी रात युद्ध स्तर पर चला। भारी मशीनों और कटर की मदद से मलबे को हटाया गया। इस जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बचाव दल का एक कर्मचारी, रॉकी डेनियल भी घायल हो गया, जो टीम के साहस और समर्पण को दर्शाता है।
मृतकों की पहचान और घायलों का विवरण
हादसे के बाद चिकित्सा विभाग और प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. नरेंद्र नागर के अनुसार, मलबे से निकाले गए लोगों में से पश्चिम बंगाल के 20 वर्षीय कोचिंग छात्र आर्यन की मृत्यु हो गई है। आर्यन कोटा में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। हादसे में घायल हुए 8 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जबकि 5 अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई है। घायलों में कोटा के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ झारखंड के मोहम्मद साबिर और रेस्टोरेंट मालिक मोहम्मद जहांगीर भी शामिल हैं।
जिला प्रशासन और रेस्टोरेंट में मौजूद भीड़
जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने बताया कि यह हादसा तलवंडी जैसे व्यस्त इलाके में हुआ। इस इमारत के निचले हिस्से में एक रेस्टोरेंट संचालित हो रहा था। शनिवार की रात होने के कारण वहां ग्राहकों की आवाजाही थी। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार, हादसे के वक्त इमारत के भीतर 12 से 15 कर्मचारी और कुछ ग्राहक मौजूद थे। प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या इमारत की संरचना में कोई तकनीकी खामी थी या सुरक्षा मानकों की अनदेखी की गई थी।
हादसे का संभावित कारण: ड्रिलिंग और वाइब्रेशन
हादसे के पीछे के कारणों को लेकर स्थानीय लोगों ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। बताया जा रहा है कि इस इमारत के ठीक पीछे वाली बिल्डिंग में पिछले कई दिनों से निर्माण कार्य चल रहा था। वहां लगातार भारी ड्रिल मशीनों और हैमर (हथौड़ों) का उपयोग किया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि ड्रिलिंग के कारण इस पुरानी इमारत में लगातार वाइब्रेशन (कंपन) महसूस हो रहा था। संभवतः इसी भारी कंपन और कमजोर बुनियाद के कारण शनिवार रात यह तीन मंजिला ढांचा ढह गया। प्रशासन अब निर्माण कार्य में शामिल ठेकेदारों और बिल्डिंग मालिकों की भूमिका की जांच कर रहा है।
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