The Bengal Files: तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता कुणाल घोष ने फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की हालिया फिल्म “द बंगाल फाइल्स” को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इस फिल्म के जरिए समाज में भड़काऊ तत्वों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है और यह पूरी तरह से एकपक्षीय एजेंडे के तहत बनाई गई है।
घोष का यह बयान उस समय आया जब बंगाल में कुछ सिनेमा हॉल मालिकों ने फिल्म को दिखाने से इनकार कर दिया। इस पर विवेक अग्निहोत्री ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के चलते फिल्म को रोका जा रहा है। जवाब में कुणाल घोष ने स्पष्ट किया कि हॉल मालिकों का फैसला स्वतंत्र है और इसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है।
कुणाल घोष ने कहा, “अगर हॉल मालिक खुद यह तय करते हैं कि वे फिल्म के नाम पर किसी भड़काऊ चीज को मंच नहीं देंगे, तो यह उनका संवैधानिक अधिकार है। इसमें किसी प्रकार का राजनीतिक हस्तक्षेप नहीं है।”
उन्होंने सवाल किया कि अगर विवेक अग्निहोत्री को सच दिखाना ही उद्देश्य है तो “गुजरात फाइल्स” या “मणिपुर फाइल्स” जैसी फिल्में क्यों नहीं बनीं? घोष ने पूछा, “जब गोधरा हुआ, तब विवेक जी की अंतरात्मा कहां थी? जब मणिपुर जल रहा था, तब आपकी अंतरात्मा चुप क्यों थी?”
घोष ने विवेक अग्निहोत्री पर ‘सेलेक्टिव अंतरात्मा’ का उपयोग करने का आरोप लगाया और कहा कि यह जनता अब समझ चुकी है कि किस तरह से कुछ फिल्में राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।
विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले में पश्चिम बंगाल सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए, लेकिन घोष ने स्पष्ट किया कि सरकार का फिल्म की रिलीज़ या रोकथाम से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने दोहराया कि फिल्म को लेकर कोई आधिकारिक बैन नहीं लगाया गया है और थिएटर मालिकों को अपने निर्णय लेने की पूरी आज़ादी है।
गौरतलब है कि विवेक अग्निहोत्री “द कश्मीर फाइल्स” जैसी विवादास्पद लेकिन सफल फिल्में बना चुके हैं। उनका कहना है कि “द बंगाल फाइल्स” भी वास्तविक घटनाओं पर आधारित है और इसे रोकने की कोशिश अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। हालांकि, फिल्म के कथित ‘भड़काऊ’ कंटेंट को लेकर टीएमसी और अन्य सेकुलर पार्टियां पहले ही चिंता जाहिर कर चुकी हैं।
कुणाल घोष द्वारा विवेक अग्निहोत्री पर लगाए गए आरोपों ने “द बंगाल फाइल्स” को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। एक ओर जहां फिल्म के समर्थक इसे ‘सच्चाई का आईना’ बता रहे हैं, वहीं विरोधी इसे ‘राजनीतिक प्रचार’ और ‘ध्रुवीकरण’ का साधन मान रहे हैं। सवाल यह भी है कि क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर एकतरफा और भड़काऊ सामग्री को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए?
Read More : Ofek 19 Launch: इजराइल ने जासूसी सैटेलाइट ‘ओफेक 19’ को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में लॉन्च किया
Vat Savitri Vrat 2026: हिंदू धर्म में ज्येष्ठ अमावस्या का विशेष महत्व है, क्योंकि इसी…
Aaj Ka Rashifal 10 May 2026: आज 10 मई 2026 दिन रविवार है. पंचांग और…
Vijay CM Oath : तमिलनाडु के राजनीतिक इतिहास में शनिवार, 9 मई 2026 का दिन…
Ambikapur Skeleton Case : छत्तीसगढ़ के धौरपुर थाना क्षेत्र में एक रोंगटे खड़े कर देने…
Tamil Nadu Politics : तमिलनाडु की राजनीति में सत्ता के शीर्ष तक पहुँचने का सफर…
iPhone 17 Pro Max : अगर आप एक प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदने का मन बना रहे…
This website uses cookies.