Lalu Yadav On RSS : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के महासचिव दत्तात्रेय होसबवाल द्वारा संविधान की प्रस्तावना से ‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्दों को हटाने की मांग के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। इसके जवाब में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने संघ पर तीखा हमला बोला है।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लालू यादव ने लिखा, “देश के सबसे बड़े जातिवादी और नफरती संगठन RSS ने संविधान बदलने की बात कही है। उनमें संविधान और आरक्षण की तरफ देखने की हिम्मत नहीं है। अन्यायी चरित्र के लोगों के मन और विचारों में लोकतंत्र और बाबा साहब के संविधान के प्रति इतनी नफरत क्यों है?”
‘समाजवादी’ और ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द संविधान की मुख्य प्रस्तावना में नहीं हैं
बता दें कि आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि संविधान की मुख्य प्रस्तावना में समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष शब्द शामिल नहीं थे, बल्कि इन्हें तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने 1976 में आपातकाल के दौरान जोड़ा था। उन्होंने इस कदम को असंवैधानिक करार दिया और इन शब्दों को हटाने की मांग की।
देश में आपातकाल लगाने के लिए कांग्रेस को माफी मांगनी चाहिए: होसबोले
25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को लेकर होसबोले ने कहा कि उस दौरान लोकतंत्र का गला घोंटा गया, हजारों लोगों को जेल भेजा गया और जबरन नसबंदी जैसे अमानवीय कृत्य किए गए। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि लोकतंत्र को कुचलने वाले आज संविधान की प्रति लेकर घूम रहे हैं। उन्होंने आज तक देश से माफी नहीं मांगी।
आरएसएस और विपक्ष आमने-सामने
इस विवाद के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। लालू यादव जैसे विपक्षी नेता इसे संघ की संविधान विरोधी मानसिकता का परिचायक बता रहे हैं, जबकि संघ इस मांग को ऐतिहासिक तथ्यों और मूल संविधान की बहाली से जोड़ रहा है।