Land for Job Scam
Land for Job Scam: बिहार के सबसे कद्दावर राजनीतिक परिवार और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के कुनबे की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली की एक अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को एक बड़ा कानूनी झटका दिया है। अदालत ने राबड़ी देवी द्वारा दायर उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपने परिवार के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के मामलों को दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की गुहार लगाई थी। इस फैसले के बाद अब स्पष्ट हो गया है कि लालू परिवार के खिलाफ कानूनी कार्यवाही उसी न्यायिक पीठ के समक्ष चलेगी, जिससे वे बचने की कोशिश कर रहे थे।
राबड़ी देवी ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में एक याचिका दाखिल की थी, जिसमें उन्होंने अनुरोध किया था कि उनके और उनके परिवार (लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव, मीसा भारती आदि) के खिलाफ लंबित सभी आपराधिक मामलों की सुनवाई वर्तमान न्यायाधीश विशाल गोगने की अदालत से हटाकर किसी अन्य न्यायाधीश को सौंपी जाए। हालांकि, अदालत ने राबड़ी देवी की दलीलों में कोई ठोस आधार नहीं पाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामलों के स्थानांतरण की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती। इस आदेश के साथ ही अब सभी संबंधित आपराधिक मामलों की सुनवाई जज विशाल गोगने की अदालत में ही जारी रहेगी।
लैंड फॉर जॉब (जमीन के बदले नौकरी) घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में अब कानूनी प्रक्रिया निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और अन्य आरोपियों के खिलाफ 9 जनवरी 2026 को औपचारिक रूप से आरोप तय करेगा। सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने कोर्ट को आरोपियों की वर्तमान स्थिति और मामले से जुड़े उन आरोपियों के मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificates) भी सौंप दिए हैं, जिनका निधन हो चुका है। आरोप तय होने की प्रक्रिया (Framing of Charges) मुकदमे की शुरुआत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण चरण होता है।
रेलवे में जमीन के बदले नौकरी देने के इस कथित घोटाले में केवल लालू यादव ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के लगभग सभी प्रमुख सदस्य कानूनी रडार पर हैं। राउज एवेन्यू कोर्ट में होने वाली अगली सुनवाई के दौरान लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, राज्यसभा सांसद मीसा भारती, बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव और हेमा यादव सहित कई अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय किए जाने हैं। कोर्ट ने सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 9 जनवरी 2026 को होने वाली सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहना होगा।
सीबीआई का आरोप है कि लालू यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान (2004-2009) रेलवे के विभिन्न जोन में ग्रुप-डी के पदों पर नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों और उनके परिवार के सदस्यों से जमीन ली गई थी। जांच एजेंसी का दावा है कि ये जमीनें लालू परिवार के सदस्यों और उनके स्वामित्व वाली कंपनियों के नाम पर अत्यंत कम कीमतों या उपहार के रूप में हस्तांतरित की गई थीं। अदालत में सीबीआई ने पर्याप्त सबूत होने का दावा किया है, जिसके आधार पर अब चार्ज फ्रेम करने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
अदालत के इस कड़े रुख और आरोप तय होने की तारीख नजदीक आने से बिहार की राजनीति में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। तेजस्वी यादव के लिए यह विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण समय है, क्योंकि वे आरजेडी के भविष्य के चेहरे के रूप में देखे जाते हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि आरोप तय हो जाते हैं, तो ट्रायल की रफ्तार तेज होगी, जिससे आगामी चुनावों से पहले लालू परिवार की राजनीतिक व्यस्तताएं और कानूनी लड़ाइयां एक साथ बढ़ जाएंगी। फिलहाल, 9 जनवरी की तारीख लालू परिवार के राजनीतिक और कानूनी भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाली है।
Read More: India Bangladesh Border Alert: बांग्लादेश संकट के बीच भारतीय सेना अलर्ट, सीमा पर बढ़ी चौकसी
AIADMK Election Manifesto: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 की सरगर्मियों के बीच ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़…
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 के सातवें दिन को 'महासप्तमी' के रूप में अत्यंत…
Chaitra Navratri 2026: चैत्र नवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर सातवां दिन मां दुर्गा के…
Ambikapur Airport: छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल के निवासियों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई…
Love Affair Case: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने…
Rinku Singh KKR Vice Captain: आईपीएल 2026 के रोमांचक सीजन के आगाज से पहले कोलकाता…
This website uses cookies.